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वक़्त: तू ही शिक्षक, तू ही समीक्षक

वक़्त:तू ही शिक्षक ,तू ही समीक्षक
समय से बड़ा शिक्षक कौन
कभी हँसा के कभी रुला के
कभी उठा के कभी गिरा के
जीवन को सिखलाता कौन।।
कौन असल है कौन नक़ल है
अपना कौन पराया कौन
वक़्त पलटते दिखला देता
पर तू रहता है ख़ुद मौन।।
जो पर्वत था अब रत्ती है
तब शरीर था अब मिट्टी है
नौबत बजती जिन दुर्गों पर
बने खंडहर रोए कौन ।।
बड़ा धनुर्धारी था अर्जुन
भीलन से लूटवाया कौन
कालिदास महामूरख से
विविधाविध ग्रंथ रचाया कौन।
ट्रेन से दौड़ा प्लेन से दौड़ा
धरती छोड़ो चाँद को रौंदा
एक कोरोना वाइरस से
दुबका जग अमरीका रोम
वक़्त वक़्त की बात है भाई
तुमसे बड़ा है शिक्षक कौन ।।
@PradeepRai

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