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स्वास्थ्य मंत्रालय का देश के 75 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील करने का प्रस्ताव

  • देश में है डाक्टरों की भारी कमी को देखते हुए उठाया कदम 

  • बढ़ेंगी दस हजार MBBS की सीटें और 8 हज़ार PG की सीटें 

  • 39 अस्पताल काम शुरू कर चुके हैं और शेष में कार्य जारी

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नई दिल्ली : देशभर में वर्तमान में 1953 लोगों पर है एक डाक्टर है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 1000 लोगों पर एक डाक्टर होना चाहिए। सरकार की योजना 2027 तक देश में 1000 लोगों पर एक डाक्टर उपलब्ध कराने की है।

डॉक्टरों की इसी कमी को देखते हुए स्वास्थ्य के क्षेत्र में मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने संबंधी एक योजना के तहत तीसरे चरण में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 75 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव केंद्र द्वारा प्रायोजित उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत जिला अस्पतालों या रेफरल अस्पतालों का उन्नयन कर नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जानी है। इस योजना में देश के पिछड़े जिलों को प्रमुखता दी जानी है। प्रथम चरण में सरकार ने 58 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में बदलने की मंजूरी दी थी। दूसरे चरण में यह मंजूरी 24 अस्पतालों के लिए थी। इनमें से 39 अस्पताल काम शुरू कर चुके हैं। शेष पर निर्माण कार्य जारी है।

केंद्र सरकार का आम जन तक चिकित्सा सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। क्योंकि भाजपा ने अभी हुए लोकसभा चुनाव में देश की जनता से जन -जन तक स्वास्थ्य सुविधायें पहुँचाने का वादा किया था। 

वहीं सरकार की इस योजना के बाद जिला अस्पतालों के उन्नयन से न केवल देश में डाक्टरों की कमी दूर की जा सकेगी, बल्कि दूर-दूर तक आम जन तक चिकित्सा सेवा भी पहुंचाई जा सकेगी। अगर इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाया जाता है तो इससे भाजपा का एक और चुनावी वादा पूरा होगा जो पार्टी ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में किया था।

इस संबंध में एक सूत्र ने बताया, ‘योजना के तीसरे चरण में 75 और जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए व्यय वित्त समिति (ईएफसी) के पास भेजा गया है। ईएफसी की मंजूरी के बाद इसे कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।’ सूत्र ने बताया, ‘इस बारे में कैबिनेट का एक नोट पहले ही तैयार किया जा चुका है।’

इस मसौदे प्रस्ताव के अनुसार, 75 जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेजों के तौर पर उन्नयन करने में करीब 325 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस योजना के कार्यान्वयन से देश में दस हजार से ज्यादा एमबीबीएस की तथा आठ हजार पोस्ट ग्रेजुएट सीटें अतिरिक्त बढ़ जाएंगी।

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