लेंसकार्ट पर भड़का भारी आक्रोश: ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ को लेकर देशभर में प्रदर्शन और बॉयकॉट की मांग
नई दिल्ली: मशहूर आईवियर ब्रांड लेंसकार्ट (Lenskart) इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर कंपनी की एक कथित ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों और आम जनता के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए तिलक, बिंदी और कलावा पहनने पर पाबंदी लगा दी थी, जिसे लोगों ने धार्मिक भावनाओं और हिंदू परंपराओं का अपमान माना है।
विवाद की जड़ क्या है?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक आंतरिक दस्तावेज (Grooming Policy) के अनुसार, लेंसकार्ट के स्टोर पर काम करने वाले कर्मचारियों को तिलक, बिंदी और कलावा जैसे धार्मिक चिन्ह पहनने की अनुमति नहीं थी। हैरानी की बात यह रही कि इसी पॉलिसी में हिजाब और पगड़ी को अनुमति दी गई थी। इस ‘दोहरे मापदंड’ को देखते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और देखते ही देखते ट्विटर (अब X) पर #BoycottLenskart ट्रेंड करने लगा।
सड़कों पर उतरा गुस्सा
यह विरोध केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहा। देश के कई हिस्सों में लोग लेंसकार्ट के शोरूम पहुंच गए:
स्टोर के अंदर तिलक प्रदर्शन: कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने स्टोर के अंदर जाकर कर्मचारियों और ग्राहकों को तिलक लगाया।
ऑर्डर कैंसिलेशन: हजारों ग्राहकों ने अपने पेंडिंग ऑर्डर्स रद्द कर दिए और ऐप को अनइंस्टॉल कर दिया।
चश्मे तोड़ने के वीडियो: कुछ वायरल वीडियो में लोग गुस्से में लेंसकार्ट से खरीदे गए चश्मे तोड़ते और फेंकते नजर आए।
पीयूष बंसल की सफाई और माफी
विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट के संस्थापक पीयूष बंसल (Peyush Bansal) ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
“कंपनी की मंशा कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। वायरल हो रहा दस्तावेज या तो पुराना है या उसमें शब्दों का गलत चयन (Language Lapse) हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा कि लेंसकार्ट सभी धर्मों का सम्मान करता है और कर्मचारियों पर तिलक या बिंदी लगाने पर कोई आधिकारिक रोक नहीं है।
जनता का भरोसा डगमगाया
पीयूष बंसल की सफाई के बावजूद, सोशल मीडिया पर लोग शांत होने को तैयार नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी कंपनी में ऐसी ‘गलती’ बिना शीर्ष प्रबंधन की जानकारी के नहीं हो सकती। लोगों का मानना है कि यह सफाई केवल आर्थिक नुकसान और ब्रांड की छवि बचाने के लिए दी जा रही है।
निष्कर्ष:
यह घटना दर्शाती है कि आज के दौर में कंपनियां अपनी आंतरिक नीतियों को लेकर कितनी संवेदनशील होने की जरूरत है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहां धर्म और परंपराएं लोगों की पहचान का हिस्सा हैं, किसी भी ब्रांड के लिए ‘सांस्कृतिक असंवेदनशीलता’ भारी पड़ सकती है। लेंसकार्ट के लिए यह विवाद केवल एक पीआर (PR) संकट नहीं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे की परीक्षा है।



