Uttarakhand

मैं फक्कड़ आदमी हूँ,जब लड़ता हूँ तो हिम्मत से लड़ता हूँ : डॉ. हरक सिंह रावत

  • अब अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के खिलाफ खोला मोर्चा
  • बीते दिन प्रमुख सचिव कार्मिक को लिखा था एक सख्त पत्र 
देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून  :  उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत आजकल अपने राज्य की ब्यूरोक्रेसी से ही भिड़ रहे हैं। उन्होंने प्रमुख वन संरक्षक के विदेश जाने के बाद अब अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के खिलाफ खोला मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सूबे के इन अधिकारियों के खिलाफ यूँ ही मोर्चा नहीं खोला है इसके पीछे उनकी लगभग 45 साल की राजनीतिक जीवन का सफर भी जुड़ा हुआ है,भले ही कोई इसे उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की लड़ाई कहे लेकिन यह बात भी सोलह आने सच है जिन मुद्दों को लेकर वे इस बार चर्चाओं में हैं वे दोनों ही मुद्दे जहां प्रदेश की जनता से जुड़े हुए मुद्दे हैं और वहीं प्रदेश हित से जुड़े हुए हैं।
 
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत द्वारा उठाये गए पहले मुद्दे की बात करते हैं  पहला मुद्दा सूबे के वनअधिकारियों द्वारा प्रदेश के जंगलों के आग में जलते छोड़ विदेश यात्रा का है जिस पर उन्होंने अपनी नाइत्तेफ़ाक़ी जताई है,उनका कहना है एक तरफ सूबे के जंगल आग में जल रहे है ऐसे में वनविभाग के मातहत अधिकारियो को विदेश यात्रा की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए थी और  वन मंत्री का यह भी कहना है कि निचले स्तर के अधिकारियों की फाइल तो अनुमोदन के लिए उनके पास आई, मगर विभाग के मुखिया को अनुमति देने से संबंधित फाइल उन तक नहीं पहुंची। जबकि वर्तमान में जंगलों की आग को देखते हुए विभाग प्रमुख के विदेश दौरे की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी वे इस यात्रा को कभी और कर सकते थे। उन्होंने इस बावत अपनी शिकायत भरे लहजे में उन्हें बाईपास करने पर प्रमुख सचिव कार्मिक को एक सख्त पत्र तो लिखा ही, साथ ही यह कहने से भी कहीं संकोच नहीं किया कि उन्हें मंत्री पद का कोई मोह जरा भी नहीं है अगर प्रदेश शासन द्वारा उनके साथ इसी तरह का नकारात्मक रुख रहा तो वे अपनी कुर्सी छोड़़ने  में भी देरी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा इससे ज्यादा चिंता की बात क्या हो सकती है कि यहां जंगलों  मे लगी है आग और जिम्मेदार अधिकारी घूम रहे है विदेश। उन्होंने कहा उत्तराखंड में अधिकारी मनमानी करने पर उतारू हैं
वहीं वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत द्वारा उठाये गए दूसरे मुद्दे की बात की जाय तो यह स्वतः ही साफ़ हो जाता है कि सूबे की ब्यूरोक्रेसी कितनी निरकुंश हो चुकी है कि वह जनहित के कार्यों पर अड़ंगा लगाने में भी पीछे नहीं है। यह मुद्दा तब गरमाया जब सूबे के अपर मुख्य सचिव ने लाल ढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग के निर्माण पर अड़ंगा लगाते हुए मुख्यमंत्री सहित वन मंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर ही ग्रहण लगा डाला। चर्चा तो यहां तक है कि अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश द्वारा इस सड़क पर रोक के आदेश को लेकर न मंत्री ने अब उनके ही खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मामले में सूत्रों ने बताया है कि इस महत्वाकांक्षी  सड़क  लाल ढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग को लेकर वन मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को जमकर लताड़ा है उन्होंने अपर मुख्य सचिव को साफ़ -साफ़ कह दिया है कि वे किसी भी सूरत  में सड़क के निर्माण होने से रोकने नहीं  देंगे तब चाहे लाल ढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग  को लेकर उन्हें खुद हो क्यों न धरने पर बैठना पड़े उसके लिए भी वे तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जनहित के फैसलों के खिलाफ निर्णय के लेकर वे एक बार नहीं सौ बार भी मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा एक तरफ अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश सड़क पर हो रहे कार्यों पर रोक के आदेश जारी कर रहे हैं  तो दूसरी तरफ और मुझे गलत जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं  इतना ही नहीं तीसरी तरफ से वहां की वीडियो ग्राफ़ी भी करवा रहे हैं जो गलत है। उन्होंने ओमप्रकाश लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाकर कार्य को रोकने का प्रयास भी कर रहे हैं। अंत में उन्होंने कहामैं फक्कड़ आदमी हूँ,जब लड़ता हूँ तो हिम्मत से लड़ता हूँ और अपने लिए नहीं प्रदेश की जनता के लिए लड़ता हूँ और मैं आज जहाँ हूँ प्रदेश की जनता द्वारा दिए गए समर्थन,प्यार और आशीर्वाद से पहुंचा हूँ मुझे जनता का साथ देना है ऐसे भ्रष्ट और नकारे अधिकारियों का नहीं।

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