UTTARAKHAND

मंगोली में ‘मधुशाला’ पर जनभावना भारी: महिलाओं के आंदोलन ने प्रशासन की बढ़ाई चुनौती

उत्तराखंड।

मधुशाला बनाम जनभावना – मंगोली का महायुद्ध” नैनीताल का मंगोली इन दिनों किसी पर्यटन स्थल से ज्यादा “आंदोलन स्थल” बन गया है। यहां की महिलाएं और ग्रामीण जिस जिद और जुनून के साथ शराब की दुकान का विरोध कर रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि अगर यही ऊर्जा ओलंपिक में लगती तो अब तक कई मेडल आ चुके होते।

प्रशासन ने सोचा होगा—“एक दुकान ही तो खोलनी है, क्या फर्क पड़ेगा!” लेकिन मंगोली की महिलाओं ने साफ कर दिया—“फर्क पड़ता है, और बहुत पड़ता है!” रातभर धरना, सुबह चक्का जाम… यानी आंदोलन अब ‘नाइट शिफ्ट’ से निकलकर ‘डे शिफ्ट’ में भी एंट्री मार चुका है।

महिलाएं पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं—नारे, चेतावनी और अब तो अनशन की भी घोषणा। दूसरी तरफ प्रशासन है, जो शायद अब भी फाइलों में समाधान ढूंढ रहा है।

सबसे दिलचस्प दृश्य तब देखने को मिला जब पुलिस ने समझाने की कोशिश की— “मैडम, सड़क से हट जाइए…” और जवाब आया— “पहले दुकान हटाइए!” ग्रामीणों का तर्क भी कम मजबूत नहीं है। उनका कहना है कि शराब की दुकान खुलने से सामाजिक माहौल बिगड़ेगा, युवा भटकेंगे और घरों की शांति खत्म होगी। वहीं प्रशासन शायद सोच रहा है कि “राजस्व भी तो कोई चीज होती है!” इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा सक्रिय अगर कोई है, तो वो हैं मंगोली की महिलाएं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जब बात घर-परिवार और समाज की आती है, तो आंदोलन की कमान किसी और के हाथ में नहीं जाती।

अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा? क्या प्रशासन झुकेगा? क्या आंदोलन और उग्र होगा? या फिर कोई ऐसा “मध्यमार्ग” निकलेगा, जिसमें न मधुशाला जीते, न जनभावना हारे?

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