


भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवन घाटी में चीनी सेना ने जो हरकत की उसे भारत भूल नहीं सकता। चीन की धोखेबाजी के कारण भारतीय सेना के 20 जवान बलिदान हुए। भारत और भारतीय सेना की यह नैतिक जिम्मेदारी रहती है कि दूसरे पक्ष पर हमला न किये बिना भारतीय सेना प्रतिपक्ष पर हमला नहीं करती है। भारत और भारतीय सेना की इस सोच से पूरी दुनिया परिचित है। इसीलिए वह चीन के इस आरोप पर यकीन नहीं कर रही कि गलवन घाटी की घटना के लिए भारत जिम्मेदार है। विश्व समुदाय इसी नतीजे पर पहुंचा है कि चीन ने काइराना हरकत की है।
चीन भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका देश में अच्छा-खासा निवेश भी है । आधारभूत ढांचे के निर्माण से लेकर बड़े स्टार्टअप में चीनी कंपनियों ने भारत में निवेश कर रखा है। इसके अलावा तमाम भारतीय उद्योग कच्चे माल, उपकरणों के लिए भारत चीन पर निर्भर हैं। चीन को जवाब देने के मामले में यह बात बार-बार सामने आ रही है कि हमारी चीन पर निर्भरता कम कैसे होगी, लेकिन इसे समझने की जरूरत है कि भारतीय उद्योग जगत जिस तरह चीन पर निर्भर है उसे देखते हुए यदि जल्दबाजी में कोई कदम उठा लिया जाता है तो यह भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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