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देहरादून में बार पर छापे के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा, अंदर पार्टी करते मिले आईजी

देहरादून में शनिवार देर रात एक बार पर तय समय सीमा के उल्लंघन पर कार्रवाई करने पहुंचे एसपी सिटी को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब अंदर एक आईजी स्तर के अधिकारी पार्टी करते मिले। रात 11 बजे की समय सीमा के बावजूद बार खुला था। मौके पर कुछ देर के लिए तनातनी की स्थिति बन गई। सूचना पर एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल पुलिस बल के साथ पहुंचे और सख्ती दिखाते हुए बार बंद कराया। घटना का वीडियो सीसीटीवी में कैद बताया जा रहा है और मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

तय समय सीमा के उल्लंघन पर कार्रवाई करने पहुंचे एसपी सिटी को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब बार के अंदर ही एक आईजी स्तर के अधिकारी मौजूद मिले। मामला शनिवार देर रात शहर के रोमियो लेन बार का है, जहां रात करीब 12:30 बजे तक शराब परोसी जा रही थी और तेज संगीत बज रहा था, जबकि प्रशासन की ओर से रात 11 बजे तक संचालन की स्पष्ट सीमा तय है।

सीसीटीवी में बाहर भीड़भाड़ नजर आने के बाद एसपी सिटी प्रमोद कुमार कई थानों की फोर्स के साथ बार बंद कराने पहुंचे। लेकिन कार्रवाई के दौरान घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। मौके पर मौजूद आईजी ने हस्तक्षेप करते हुए एसपी सिटी को कार्रवाई से रोकने और फोर्स के साथ लौटने को कह दिया। बताया जा रहा है कि आईजी अपने परिचितों के साथ बार में पार्टी कर रहे थे। इस दौरान कुछ देर के लिए मौके पर तनातनी जैसे हालात बन गए।

मामले की जानकारी मिलते ही एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल खुद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए करीब एक बजे बार बंद कराया। बताया जा रहा है कि कप्तान ने हाथ में डंडा लेकर पूरे स्टाफ को नीचे बुलाया और भविष्य में नियमों का उल्लंघन न करने की सख्त चेतावनी दी। तब तक संबंधित आईजी वहां से जा चुके थे। पूरी घटना बार के सीसीटीवी कैमरों में कैद बताई जा रही है।

गौरतलब है कि 30 मार्च को ब्रिगेडियर मुकेश जोशी हत्याकांड के बाद पुलिस प्रशासन ने बार-पब के संचालन समय को लेकर सख्ती बढ़ाई थी। आरोपियों के देर रात बार में शराब पीने के बाद वारदात को अंजाम देने के तथ्य सामने आने के बाद सभी बार को रात 11 बजे तक बंद करने के निर्देश दिए गए थे और निगरानी भी बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी जारी है।

अब यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से तूल पकड़ रहा है। लोग संबंधित आईजी का नाम सार्वजनिक करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जब नियमों को लागू कराने वाले ही उनके उल्लंघन में शामिल दिखें, तो कानून का पालन कैसे सुनिश्चित होगा।

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