Uttarakhand

शिक्षा के स्तर को बढ़ाने हेतु अवकाश में भी स्वयंसेवी शिक्षकों का जारी है प्रयास

  • शीतकालीन अवकाशों में हो रही कार्यशालाएं आयोजित
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून : मिशन शिक्षण संवाद उत्तराखंड से जुड़कर उत्तराखंड के हज़ारों शिक्षक शिक्षा और शिक्षण के उन्नयन के लिये विद्यालयों में हो रहे अवकाशों के बाद भी प्रयासरत हैं। छात्र हित को प्रमुख मानते हुए नवाचारी एवम रचनात्मक शिक्षण विधाओं का प्रयोग न केवल अपने विद्यालय में कर अपने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान करते हैं बल्कि उसे सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न विद्यालय में भेज कर दूसरे शिक्षक साथियों और दूसरे स्कूल के बच्चो को भी लाभ पहुँचाते हैं।
राज्य संयोजक लक्ष्मण सिंह मेहता ने बताया गया कि इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए मिशन शिक्षण संवाद ने शीतकालीन अवकाशों में दो कार्यशालाएं आयोजित की। प्रथम कार्यशाला 9 जनवरी 2019 को अगस्त्यमुनि, जिला रुद्रप्रयाग में गढ़वाल मंडल संयोजक माधव सिंह नेगी के नेतृत्व में और द्वितीय कार्यशाला 12 जनवरी 2019 को हल्द्वानी, जिला नैनीताल में संतोष जोशी, कुमाऊँ मंडल संयोजक के नेतृत्व में आयोजित की गई। श्री मिशन संस्थान चम्पावत के दीपक जोशी ने आर्थिक सहयोग देकर दोनो मण्ठलो की कार्यशाला मे सहयोग किया।
दोनों ही कार्यशालाओं में मुख्य बिंदु यही थे कि शिक्षक स्वयं स्वेच्छिक रूप से नवाचारी शिक्षण करने को प्रयासरत है, और दूसरे शिक्षक साथियों को अभिप्रेरित कर उन्हें भी प्रभावी शिक्षण हेतु प्रेरित किया जाए, छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। निकट भविष्य में छात्रवृत्ति , क्विज आदि प्रतियोगिताएं कराने का निर्णय भी उपरोक्त कार्यशालाओं में लिया गया है जिसके लिये धन की व्यवस्था मिशन के शिक्षकों द्वारा की जाएगी।
  • मिशन शिक्षण संवाद क्या है? जानिए ……
मिशन शिक्षण संवाद आपसी सीखने-सिखाने के लिए कार्य करने वाले ऐसे स्वैच्छिक स्वयंसेवी  शिक्षकों का समूह है जो शिक्षा का उत्थान , शिक्षक का सम्मान के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • मिशन शिक्षण संवाद के कार्यक्षेत्र क्या हैं जानिए ? 
?1- शिक्षा के उत्थान का मुख्य आधार होता है शिक्षण। इसलिए हम सब का सबसे पहला काम है अपने और अपने साथियों के विद्यालय के शिक्षण को प्रेम और प्रोत्साहन की शक्ति से आपसी सीखने-सिखाने के साथ मजबूत करना और एक-दूसरे को विभिन्न शिक्षण गतिविधियों की जानकारी देकर  सहयोग करना।
?2- शिक्षकों द्वारा किये गये उत्कृष्ट एवम रचनात्मक कार्यों को समाज,  तक पहुँचाना। इससे हम सब भी अपने शिक्षा के उत्थान के संकल्प को जन- जन तक मजबूत विश्वास के साथ पहुँचा सकते हैं तथा आपसी सहयोग के विश्वास को मजबूत बना सकते हैं। क्योंकि शिक्षक और समाज एक दूसरे के पूरक हैं बिना इसके आपसी सहयोग और विश्वास के शिक्षा का उत्थान चुनौतीपूर्ण है। 
?3-   समाज में शिक्षकों का मान सम्मान बढे ऐसा कुछ प्रयास करते रहना है। साथ ही उत्कृष्ट कार्य कर रहे शिक्षक साथियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन करना।
मिशन शिक्षण संवाद का सहयोगी वह प्रत्येक व्यक्ति बन सकता है जो शिक्षा का उत्थान और शिक्षक के सम्मान के सम्मान में स्वैच्छिक स्वयंसेवी रूप से सेवा हो।

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