UTTARAKHAND

केदारनाथ धाम में हार्ट अटैक से गुजरात के श्रद्धालु की मौत

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। एक मरीज को यथासमय मेडिकल सहायता नहीं मिली। डेढ़ घँटे इलाज नहीं मिलने से श्रदालु की मौत हो गयी।

कपाट खुलने के पहले दिन गुजरात से दर्शन करने आए एक श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत के बाद उनके परिजनों को शव को नीचे ले जाने के लिए घंटों तक परेशान होना पड़ा। मृतक के बेटे ने प्रशासन पर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार गुजरात के बड़ौदा निवासी टूर आपरेटर अंकुर कुमार अपने माता-पिता के साथ केदारनाथ दर्शन के लिए आए थे। अंकुर कुमार के अनुसार उनके पिता को अचानक हार्ट संबंधी समस्या हुई और वह गिर पड़े। इसके बाद उन्होंने तुरंत 100 नंबर पर फोन कर मदद मांगी। उन्हें आश्वासन दिया गया कि टीम 5 से 10 मिनट में पहुंच जाएगी, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक कोई सहायता नहीं पहुंची। अंकुर ने सीएम धामी से भी बात की। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया।।

अंकुर का आरोप है कि अंततः उन्हें खुद ही अपने पिता को पिठू पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतक के बेटे ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता का शव करीब दो घंटे तक हेलीपैड पर धूप में पड़ा रहा। उनका कहना है कि प्रशासन ने शव को हेलीकॉप्टर से नीचे भेजने में असमर्थता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अन्य कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध हो सकता है तो मृत श्रद्धालु के शव को सम्मानपूर्वक ले जाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

अंकुर कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने रुद्रप्रयाग प्रशासन से मदद मांगी तो उन्हें एंबुलेंस का नंबर दिया गया। उनका कहना है कि एंबुलेंस संचालक ने शव को दिल्ली एयरपोर्ट तक ले जाने के लिए 16 हजार रुपये की मांग की।

वहीं उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि कंट्रोल रूम को हेलीपैड पर शव होने की शुरुआती जानकारी नहीं थी। जैसे ही महानिदेशक बंशीधर तिवारी से दोपहर करीब 12 बजे सूचना मिली, 10 से 15 मिनट के भीतर हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर शव को नीचे पहुंचाया गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान चिकित्सा सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होती है।

मृतक के बेटे ने लापरवाही के आरोप जड़े

घटना के बाद चारधाम यात्रा की तैयारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ उत्तराखंड पहुंचते हैं, ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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