UTTARAKHAND

उत्तराखंड को गुण्डों,ब्लेकमेलरों व भ्रष्टाचारियों से मुक्त कराते मुख्यमंत्री

  • अमन पसंद सूबे में शांति का राज कायम करने में सफल हो रहे हैं मुख्यमंत्री..!

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तराखंड के आठवें मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने अब तक के कार्यकाल में साफ संकेत दे दिया है कि उत्तराखंड को गुण्डों,ब्लेकमेलरों व भ्रष्टाचारियों के हवाले नहीं किया जा सकता और इसी भीष्म प्रतिज्ञा को लेकर वे आगे बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि यह इतना आसान नहीं है कई बार इस तरह की प्रतिज्ञा में अपने ही हाथ जलने का ख़तरा रहता है लेकिन त्रिवेंद्र रावत की नीति और नीयत पर राज्यवासियों को जरा भी शक नहीं कि 18 साल से 19 से वर्ष के उत्तराखंड के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनके इस प्रण को देखते हुए या साफ़ है कि अब राज्य में ज्यादा लूटखसोट की संभावना नहीं है।

पहले बात करें बात बात पर गोली दागने वाले  कथित बाहुबली विधायक चैंपियन की  जिन्होंने तिवारी सरकार से लेकर अब तक हर मुख्यमंत्री को अपनी दबंगता दिखाते हुए अपने कब्जे में किया हुआ था या यूँ कहें उनका धमकी भरा अंदाज देख कर कोई उनके काबू में रहा लेकिन उन्होंने जब त्रिवेंद्र रावत को भी उन्हीं मुख्यमंत्रियों की तरह दबाव और रौब से धमकाना चाहा तो त्रिवेंद्र रावत ने उन्हें साफ समझा दिया  …..जिके बाद से बेचारे विधायक अब मीडिया से ही गायब हैं ….वरना उनके धमकी भरे वक्तव्य गाहे बगाहे अखबारों की सुर्ख़ियों में छपते रहते थे…

वहीं ताज़ा प्रकरण ब्लैकमेलिंग के मामले में सलाखों के पीछे पहुँच चुके उमेश कुमार का है जो हरियाणा से उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आते ही एक टूटे स्कूटर पर देहरादून आया और सूबे के दूसरे मुख्यमंत्री की किचन कैबिनेट का ख़ास सदस्य बन गया। उसके बाद से सूबे के अब तक के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने इशारों पर नचाने वाला एक तथाकथित पत्रकार कैसे पहाड़ी नेताओं व भ्रष्ट नौकरशाही के किचन कैबिनेट का अहं सदस्य बनकर करोड़ों का मालिक बन बैठा और कुछ समय बाद उसने जिनकी बदौलत धन कमाया उन्हीं के पीछे भस्मासुर की तरह पड़ गया….तो वे बेचारे अब भागे -भागे शिव की तरह अपनी जान बचाने फिर रहे हैं। 

चर्चा तो अब यहां यह चल पड़ी है कि एक दूसरे उत्तराखंडी नेताओं को आपस में भिड़ाने में माहिर एक चैनल के मालिक उमेश शर्मा को हरीश रावत के स्ट्रिंग आपरेशन के बाद यह गलतफहमी हो गई थी कि वे छोटे से राज्य उत्तराखंड के सबसे बड़े चाणक्य हैं…..और उत्तराखंड की नौकरशाही और नेताओं को वे अपने इशारों से नचा सकते हैं। 

लेकिन उन्हें शायद यह पता नहीं था कि उत्तराखंड के एक छोटे से गांव खैरासैंण सतपुली के त्रिवेंद्र रावत इतने सख्त होंगे कि वे अपने पर उसकी मुलाकात तो क्या  छाया भी नहीं पड़ने देंगे जो उत्तराखंड को लूट अपनी जेब भरने के किये कुछ भी कर सकता है।  यह भी पता चला है कि पहली बार त्रिवेन्द्र सरकार में ऐसे लोगों के धंधे के सभी द्वार बंद हो गये थे…..इसलिये ब्लैकमेलिंग के आरोपी ने कुछ भ्रष्ट नौकरशाहों और  पैसा कमाने के लिए कुछ भी करने वाले ऐसे कुछ लोगों के बल पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित अपर मुख्यसचिव तक को ही फांसने की योजना बना डाली….और बस यही इसके लिये आत्मघाती कदम बना….और अपने ही बने जाल में वह खुद ही फंस गया। 

सूत्रों के अनुसार, इससे पूर्व भी इस गिरोह द्वारा कई अधिकारियों का स्ट्रिंग कर उनसे बड़ी उगाही की जा चुकी है……सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों को जब इस षडयंन्त्र का पता चला तो वे भौंचक्क रह गये इतने में  वह व्यक्ति खुद ही पुलिस तक पहुँच गया जो उमेश के लिए कई स्ट्रिंग आपरेशन कर चुका था…उसने दस अगस्त को उमेश के खिलाफ राजपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस और प्रशासन को जब पता चला कि यह मामला हल्का नहीं बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का षड्यंत्र है तो पुलिस और अधिकारियों ने भी मामले की गोपनीय नीति बनाते हुए ऐसा जाल बिछाया कि आरोपी उमेश सहित  अधिकारियों व मीडिया में फैले लोगों तक को कानों -कान खबर तक नहीं हुई…..यह संभवत उत्तराखंड का सबसे गोपनीय मिशन था…..जिसको राज्य के अति विश्वसनीय पुलिस अधिकारियों की टीम ने अंजाम दिया..

चर्चा तो यहाँ तक है कि आरोपी उमेश ने भी यहां के नेताओं को खूब बनाया, वह एक नेता से दुश्मनी करते थे तो दूसरे नेता के साथ मालपूवा खाते थे।  लेकिन यहाँ के नेताओं की आपसी प्रतिस्पर्धा और रातोंरात करोड़पति बनने के सपनों से सबसे ज्यादा इस राज्य का नुकसान किया है। इसी प्रतिस्पर्धा का उत्तराखंड से बाहर से आये कुछ गुण्डों , ब्लेकमेलरों व भ्रष्टाचारियों ने कई भेषों में यहाँ आकर जमकर अपना खेल खेला और कुछ अभी भी खेल रहे हैं।  ऐसे लोगों के लिए उत्तराखंड  देश -दुनिया के सबसे ज्यादा सुरक्षित स्थान नज़र आया है क्योंकि यहाँ के लोग बेहद सीधे सादे और किसी के काम में बे वजह अड़चन डालने वाले नहीं हैं। इसी का फायदा बाहर से आये दुष्ट प्रवृति के लोगों ने उठाया और यहाँ की नौकरशाही से लेकर राजनीती तक को दूषित करने में कोई कोर कसर इन्होने नहीं छोड़ी।  

त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आते ही शायद अपना इरादा साफ कर दिया था कि वे अनावश्यक दबाव में नहीं आयेंगे तब वह चाहे पार्टी के अंदर हो या बाहर। उनकी इस प्रतिज्ञा में में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जहाँ उन्हें आशीर्वाद मिल रहा है वहीँ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का सहयोग। क्योंकि भाजपा के इन दोनों सर्वोच्च नेताओं का देश में सुशासन का जो सपना है उसे पूरा करने के लिए त्रिवेंद्र रावत सहित देश के अन्य भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों ने  देश में अलग स्थान बनाया है। खैर, जो भी हो गुण्डों, मवालियों, ब्लेकमेलरों के खिलाफ मुख्यमंत्री की यह पहल काबिले तारीफ है.अन्य नेताओं को भी अपने मुख्यमंत्री के तर्ज पर बाहरी दलालों को गेट से बाहर ही रखने होंगे वरना जनता सब जानती है…..कौन कितने पानी में है। 

devbhoomimedia

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