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जब हो बे-वजह की निंदा तो क्यों करें बे-वजह की चिंता…….

सीएम नहीं दे रहे कोई तरजीह, छटपटा रहे हैं चंद स्वार्थी तत्व

सोशल मीडिया में त्रिवेंद्र को घेरने की कोशिशें

गिने-चुने विवादित लोगों ने बना रखा है एक गैंग

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

विऱोध को सियासी दाना-पानी मिलने की भी चर्चाएं

इस पूरे मामले में एक अहम चर्चा यह है कि इस गैंग को किसी न किसी स्तर से सियासी दाना-पानी भी मिल रहा है। इनमें कुछ अपने भी शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने ऐसे कथित अपनों के बारे में भाजपा हाईकमान को अवगत भी करा दिया है।

देहरादून। पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को सोशल मीडिया पर घेरने की कोशिशें खासी तेज हो रही हैं। चंद विवादित लोग त्रिवेंद्र की किसी भी बात या काम में कथित तौर पर खामियों का दुष्प्रचार करने में जुटे हैं। अहम बात यह भी है कि इन बे-वजह की आलोचनाओं पर मुख्यमंत्री भी कोई तव्वजो नहीं दे रहे हैं। नतीजा ये है कि ये चंद स्वार्थी तत्व इन दिनों खासे बौखलाए हुए हैं।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदनाम करने की साजिश चल रही है। इस साजिश में खुले तौर पर कुछ स्वार्थी तत्व अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। एक-दो छोटे समाचार पत्र भी इसमें शामिल हैं। ये लोग रोजना ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र पर अनर्गल आरोप लगाते हुए पोस्ट सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। इन पोस्ट और इन पर आने वाले सबसे पहले कमेंट करने वालों के नामों पर नजर डाली जाए तो साफ दिखेगा कि एक गैंग ही है। यह जरूर है कि आम अवाम के कुछ लोग भी इनके दुष्प्रचार के फेर में अपनी टिप्पणी कर रहे हैं। आलम ये है कि अगर इस गैंग को जानकारी मिल जाए कि त्रिवेंद्र क्या खाना खा रहे हैं, उसे भी मुद्दा बना दें। 

इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि सीएम त्रिवेंद्र इन बे-बजह की निंदा और आलोचनाओं से बे-परवाह अपने काम में लगे हैं। सीएम दफ्तर के एक सूत्र का कहना है कि मुख्यमंत्री की सोच है कि जब कुछ है ही नहीं तो इन फिजूल की आलोचनाओं को तरजीह दी ही क्यों जाए। यही वजह है कि मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया टीम की ओर से इस पर कोई टिप्पणी भी नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री की ओर से कोई टिप्पणी न आने से इस गैंग में इस समय बौखलाहट का आलम है। 

चर्चा है कि इस गैंग के मूल में जो लोग शामिल हैं जिनका उत्तराखंड से न कोई लेना देना है और न उत्तराखंडवासियों से ही उनका कोई सरोकार ही है।  ऐसे चंद लोग जो उत्तराखंड को अपना चरागाह बनाने की कोशिश में हैं। इससे पहले की सरकारों के कार्यकाल के दौरान पर यदि नज़र दौड़ाई जाय तो चाहे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का कार्यकाल रहा हो या पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का और अब त्रिवेंद्र सिंह रावत का। ऐसे तत्व हमेशा अपना उल्लू सीधा न होने पर या यूँ कहें उनके उल्टे सीधे काम न होने पर राज्य सरकार के खिलाफ एक सोची समझी रणनीति के तहत दुष्प्रचार करते रहे हैं। इनके दुष्प्रचार से यह लगता है जैसे इसके सिवा उत्तराखंड राज्य का इनसे बड़ा हिमायती कोई है ही नहीं।   

 

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