UTTARAKHAND

चार धाम देवस्थानम बोर्ड मामले में याचिका पर सरकार से माँगा जवाब

सरकार किसी भी मंदिर का अधिग्रहण नहीं कर सकती यह असंवैधानिक : डॉ. स्वामी 

राज्य सरकार से याचिकाकर्ता के तमाम सवालों का विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नैनीताल। उत्तराखण्ड चार धाम देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ भाजपा के वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोमवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सरकार के निर्णय को एक याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की तरफ से देवस्थानम एक्ट  को कोर्ट में चुनौती दी गई ।

याचिकाकर्ता डॉ स्वामी की तरफ से उठाए गए आपत्तियों पर कोर्ट ने राज्य सरकार को 3 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। डॉ स्वामी ने देवस्थानम एक्ट को चुनौती देते हुए मांग की है कि सरकार किसी भी मंदिर का अधिग्रहण नहीं कर सकती यह असंवैधानिक है और कोर्ट इस एक्ट पर तत्काल रोक लगा लगाए कोर्ट ने फिलहाल एक्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया लेकिन राज्य सरकार से याचिकाकर्ता के तमाम सवालों का विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और रमेश चंद्र खुल्बे की कोर्ट में हुई।याचिकाकर्ता ने कहा कि बीजेपी किसी भी मंदिर को सरकारी नियंत्रण के खिलाफ है लेकिन उत्तराखंड में ठीक इसके उल्टा किया जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने उससे मांग की थी कि वह इस एक्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दे।कोर्ट में बहस के दौरान एडवोकेट जनरल ने डॉक्टर स्वामी की याचिका को पब्लिसिटी स्टंट करार दिया जिस पर डॉ स्वामी ने कड़ी आपत्ति जाहिर की और कहा कि वह खुद बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं इसलिए पब्लिसिटी का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता।

सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे को राजनीतिक और पब्लिसिटी पीआईएल इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने जनहित में यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की है और कोर्ट में इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के आदेश दिए हैं सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस पर भी आरोप लगाया कि कांग्रेस भले ही समय इस एक्ट का विरोध कर रही हो लेकिन जैसे ही सत्ता में आएगी वह इस एक्ट को रद्द नहीं करेगी और उनका कॉन्ग्रेस पर कोई भरोसा नहीं है

पूरे प्रदेश में तीर्थ पुरोहित चार धाम देवस्थान एक्ट का विरोध कर रहे हैं इससे पहले अंग्रेजों के जमाने के समय से बद्री केदार एक्ट से बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति का प्रबंधन संचालित किया जाता था अब इस एक्ट के बाद बीकेटीसी एक्ट स्वत ही खत्म हो गया है।पहले बीकेटीसी में 47 मंदिर थे और अब देवस्थानम एक्ट में चार धाम को मिलाकर 51 मंदिर शामिल कर दिए गए हैं। इस एक्ट के तहत एक हाई पावर कमेटी का गठन किया जाएगा जिस कमेटी के मुख्यमंत्री अध्यक्ष होंगे इसके अलावा मुख्य सचिव ,सचिव वित्त सचिव पीडब्ल्यूडी सचिव पर्यटन और सचिव लोक निर्माण विभाग सहित कई अफसरों की पूरी फौज शामिल रहेगी। इस एक्ट के गठन के बाद जो हाई पावर कमेटी बनेगी वह चारों धामों के साथ इन सभी मंदिरों की पूरी प्रबंधन और वित्तीय नियंत्रण अपने पास रखेगी। सरकार का दावा है कि इससे चार धाम की व्यवस्थाएं सुधरेगी और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी जबकि तीर्थ पुरोहित समाज इसे अपने हक हकूक पर कुठाराघात मान रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने देहरादून में इसका जमकर विरोध किया और उसके बाद सुब्रमण्यम स्वामी से अपील की कि वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करें।

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