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उत्तराखंड के काम नहीं आई कोरोना संकट में भी बलूनी और रेल मंत्री की मित्रता

क्या सांसद बलूनी को सहयोग के लिए राज्य सरकार से किसी आग्रह का इंतजार है

केंद्र में बेहतर संबंधों की दुहाई देने वाले बलूनी संकट की घड़ी में उत्तराखंड के लिए क्या कर रहे हैं

मुख्य़मंत्री त्रिवेंद्र ने राज्य के लोगों को देशभर से लाने के 12 स्पेशल ट्रेनों की मांग की थी रेल मंत्री पीयूष गोयल से

देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून। लगता है कोरोना संक्रमण की आपात स्थिति में राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी की रेल मंत्री पीयूष गोयल से मित्रता काम नहीं आ रही है। बलूनी संकट के समय में देशभर में फंसे प्रवासियों को उत्तराखंड तक पहुंचाने में कोई मदद नहीं करा पा रहे हैं। ऐसा भी हो सकता है कि बलूनी उत्तराखंड सरकार को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी मदद के बिना राज्य के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन नहीं हो सकता। क्या बलूनी राज्य सरकार से किसी आग्रह का इंतजार कर रहे हैं ?

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अगर ऐसा है तो वह यह समझने की भूल कैसे कर सकते हैं कि केंद्र सरकार से 12 स्पेशल ट्रेनों की मांग त्रिवेंद्र सिंह रावत ने व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि उस राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कर रहे हैं, जहां के बड़ी संख्या में लोगों को इस समय मदद की जरूरत है। 
लॉकडाउन में देशभर में फंसे लोगों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के केंद्र सरकार ने स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। उत्तराखंड के भी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई, चंडीगढ़, जयपुर, लखनऊ, हैदराबाद, चेन्नई  सहित देशभर में फंसे हैं। ये लोग अपने घर आना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने स्वयं को राज्य सरकार के समक्ष रजिस्टर्ड भी किया हैै।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से बात करके उनसे 12 स्पेशन ट्रेनों को उत्तराखंड के देहरादून व हल्द्वानी स्टेशनों के लिए संचालित करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने रेल मंंत्री से दिल्ली से देहरादून, दिल्ली से हल्द्वानी, चंडीगढ़ से देहरादून, लखनऊ से देहरादून, लखनऊ से हल्द्वानी, जयपुर से देहरादून, जयपुर से हल्द्वानी, मुम्बई से देहरादून, मुम्बई से हल्द्वानी, भोपाल से देहरादून, बैंगलुरू से देहरादून और अहमदाबाद से देहरादून के लिए विशेष ट्रेन चलाने का अनुरोध किया था। 
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर रेल मंत्री ने बताया था कि लम्बी दूरी की ट्रेनों की अनुमति दे दी जाएगी, जबकि कम दूरी की ट्रेनों के लिए गृह मंत्रालय से अनुमति की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली, चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोग हैं, जो राज्य में आना चाहते हैं। इसलिए इन स्टेशनों से भी ट्रेन चल सकें, इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध करेंगे। 
वहीं राज्य ने ट्रेन सेवाओं का लाभ नहीं मिलने पर नजदीकी राज्यों से परिवहन निगम की बसों से लोगों को उत्तराखंड लाना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने अपने स्तर से प्रवासियों को उनके घर पहुंचाना शुरू कर दिया हैै। 
सवाल यह है कि आए दिन रेल मंंत्री सहित केंद्र सरकार में अपने बेहतर संबंधों की दुहाई देने वाले सांसद अनिल बलूनी इस संकट की घड़ी में क्या कर रहे हैं ? अगर बलूनी उत्तराखंड की मदद करते हैं तो यह उनकी तरफ से राज्य सरकार पर कोई एहसान नहीं होगा, बल्कि सांसद होने के नाते यह उनका कर्तव्य भी बनता है कि आपात स्थिति में राज्य और यहां के निवासियों के मदद करें। लेकिन बयानों के लिए विख्यात हो चुके सांसद की कैरोना महामारी  के इस आपातकाल में चुप्पी के कई मायने लगाये जा रहे हैं।  

एक मई को बलूनी ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया था कि  ”उत्तराखंड के हजारों प्रवासी कोविड-19 के कारण देश के विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। वे अपने घर उत्तराखंड आना चाहते हैं। भारत सरकार ने देशभर में एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए नॉन स्टॉप ट्रेन के संचालन हेतु विचार किया है। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी व रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का इस निर्णय के लिए धन्यवाद करता हूँ। मैंने आज माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से मुंबई, पुणे, इंदौर, बेंगलुरु, जयपुर और गुजरात के विभिन्न शहरों में फंसे उत्तराखंडियों की सकुशल वापसी हेतु विशेष रेल चलाने का अनुरोध किया। उन्होंने आश्वस्त किया है कि प्राथमिकता के आधार पर वे उत्तराखंड की चिंता करेंगे” । 
इसके बाद क्या हुआ, बलूनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही, बताना जरूरी नहीं समझा। क्या फेसबुक पर मांग करने भर से ही जनता की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। 

devbhoomimedia

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