TEMPLES

मंदिरों के बंद होने से खतरे में है पंडों व पुरोहितों की आजीविका

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर गुहार लगाने की योजना

मोहन भुलानी

देवभूमि उत्तराखंड मे हरिद्वार से लेकर पहाड़ों मे अनेक मंदिर मशहूर है। इन मंदिरों में रोजाना दूर-दराज से अनेकों दर्शनार्थी पहुंचते थे। इनसे मिलने वाले चढ़ावे से हजारों पंडों और पुरोहितों की रोजी-रोटी चलती थी। राज्य के प्रमुख मंदिरों में पंडों -पुरोहितों की तादाद लगभग हजारों मे है। लेकिन कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के अंदेशे से लॉकडाउन के दौरान तमाम सभी छोटे -बड़े मंदिरों के बंद रहने से इनके चढ़ावे और दक्षिणा से रोजी-रोटी चलाने वाले हजारों पंडों-पुरोहितों के सामने फाकाकशी की नौबत आ गई है। इन लोगों ने निरुपाय होकर अब मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाने की योजना बनाई है।

कोरोना की वजह से होने वाले लॉकडाउन से पहले तक इन मंदिरों में रोजाना भारी भीड़ जुटती थी। लेकिन लॉकडाउन के दौरान सुरक्षा के लिहाज से इन मंदिरों को बंद करने के बाद अब मंदिरों और उनके आसपास के इलाकों में सन्नाटा पसरा है। नतीजतन चढ़ावे के तौर पर रोजाना होने वाली कमाई बंद है। इसकी वजह से पुरोहितों के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है। इन पुरोहितों का परिवार मंदिरों के चढ़ावे से होने वाली कमाई से ही चलता था।

लगातार बढ़ती परेशानी की वजह से इन पुरोहितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री ममता से मुलाकात कर उनको अपनी समस्या से अवगत करने का मन बनाया है तथा मदद भी लगाएंगे। इन पुरोहितों को आशंका है कि चार धाम के कपाट खुलने के बाद भी इस वर्ष श्रद्धालुओ का आना न के बराबर रहेगा। कोरोना के मामलों में लगातार तेजी आने की वजह यह तय माना जा रहा है कि लॉकडाउन अभी लंबा खिंचेगा। इससे परिस्थिति और जटिल होने का अंदेशा है। केदारनाथ मंदिर के अंतर्गत तुंगनाथ मंदिर के पुरोहित प्रकाश मैठाणी कहते हैं, “हमारा कोई नियमित वेतन नहीं है। रोजोना मिलने वाली दक्षिणा और चढ़ावा ही हमारी आय का एकमात्र साधन है। लेकिन मंदिरों में ताला बंद होने की वजह से अब हम लोग पैसे-पैसे के लिए मोहताज होते जा रहे हैं।”

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