Uttarakhand

गर्मियों में वनाग्नि रोकना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती!

  • -अब तक करोड़ों की वन संपदा हो चुकी है जलकर खाक
देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून। हर साल प्रदेश के जंगलों में लगने वाली वनाग्नि रोकना सरकार और वन विभाग के लिए चुनौती बनी रहती है। जबकि, दावानल पर काबू पाने के लिए सरकार प्रतिवर्ष लाखों रुपए पानी की तरह बहाती है। बावजूद इसके वन महकमे के तमाम इंतजामात धरे के धरे रह जाते हैं।
 प्रदेश में अब तक दावानल से करीब 37791 हेक्टेयर की वन संपदा जलकर खाक हो चुकी है। जिसका मूल्य करीब 8 करोड़ 64 लाख 9 हजार रुपए आंका गया है। प्रदेश में पारे की उछाल के साथ ही जंगलों की आग ने वन विभाग की बेचैनी बढ़ा दी है। वहीं वन विभाग जंगलों के आग पर काबू पाने के लिए पहले ही रणनीति बनाने में लगा हुआ है।
जबकि, विगत वर्षों में प्रदेश के जंगलों को आग से काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं, जब नुकसान के बारे में आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गोनिया जानकारी मांगी तो रिकॉर्ड चैंकाने वाले निकले। प्रदेश बनने के बाद अब तक जंगलों में करीब 37791 हेक्टेयर वन और अमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो चुकी है। जिससे करीब 8 करोड़ 64 लाख 9 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। जबकि वन विभाग ने जंगलों में आग लगाने वाले करीब 15 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है जिनके खिलाफ कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
2000 में 925 हेक्टेयर में 2 लाख 99 हजार का नुकसान हो चुका है। वहीं, पिछले साल 2018 में प्रदेश के जंगलों में लगी भीषण आग में सबसे ज्यादा 4480 हेक्टेयर वन संपदा जल कर खाक हुई थी। जिससे करीब 86 लाख रूपए की वन संपदा जलकर खाक हुई। आरटीआई से मिली जानकारी में बताया गया है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए विभाग द्वारा फायर प्रबंधन योजनाएं, मास्टर प्लान, कंट्रोल रूम, क्रू स्टेशन, वॉच टावर, वायरलेस संचार नेटवर्क, सेटेलाइट समेत जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि जंगलों में आग कम लग सकें।

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