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तीर्थ पुरोहितों के विरोध के आगे झुकी सरकार, श्राइन बोर्ड के ढांचे मे फेरबदल

कैबिनेट के फैसले के अनुसार श्राइन बोर्ड का सीईओ व उपाध्यक्ष होगा हिन्दु अनुयायी 

श्राइन बोर्ड में पुजारियों के तीन प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे

श्राइन बोर्ड में इसके सीईओ और पदेन सचिव होंगे हिन्दू व वरिष्ठ आईएएस अफसर 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून। तीर्थ पुरोहितों के विरोध के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने चार धाम श्राइन बोर्ड के ढांचे में फेरबदल किया है। शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में एक बार फिर श्राइन बोर्ड पर प्रस्ताव पारित किया गया। 10 दिन पहले ही कैबिनेट ने श्राइन बोर्ड को लेकर प्रस्ताव पारित किया था।

तीर्थ पुरोहितों के कड़े विरोध के बाद इसके ढांचे में बदलाव कर दिया गया और आईएएस अफसरों की जगह हिंदू अनुयायी को सीईओ बनाया गया है। तीर्थ-पुरोहितों के हक-हकूक को न छेड़ने का भी फैसला किया गया है। विधानसभा परिसर में हुई कैबिनेट में कुल सात प्रस्ताव आए थे जिनमें से 4 पर मुहर लगी। इसमें सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला श्राइन बोर्ड से संबंधित था।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार श्राइन बोर्ड का सीईओ हिन्दु अनुयायी होगा, उपाध्यक्ष भी हिन्दु अनुयायी होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो उपाध्यक्ष विभागीय मंत्री होगा। आज के पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि सभी मंदिरों से सम्बन्धित पुजारी, न्यासी, तीर्थ पुरोहित और पंडों के हक-हकूक यथावत बने रहेंगे।

गौरतलब हो कि 27 अक्टूबर को लिए श्राइन बोर्ड के फैसले में कहा गया था कि चारधाम विकास बोर्ड के अध्यक्ष सीएम होंगे और धर्मस्व और संस्कृति विभाग के मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। पुराने फैसले के अनुसार तीन सांसद और छह विधायक बोर्ड के सदस्य होंगे। चार अन्य सदस्यों को सरकार नामित करेगी। पुजारियों के तीन प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। वरिष्ठ आईएएस अफसर इसके सीईओ और पदेन सचिव होंगे।

कैबिनेट ने एक अन्य फैसले में रिवर राफ्टिंग और काइकिंग की आयु सीमा को बदल दिया है। पहले रिवर राफ्टिंग की आयु सीमा 14 से 65 साल थी अब यह न्यूनतम 12 साल होगी और अधिकतम कितनी भी हो सकती है। काइकिंग की आयु सीमा पहले 12 से 50 साल थी अब यह भी न्यूनतम 12 साल और अधिकतम कितनी भी हो सकती है।

चौथा फैसला पशुपालन विभाग लिपिक संवर्ग सेवा नियमावली को मंजूरी देने का है। इसमें पहले 3 संवर्ग कुमाऊं, गढ़वाल और पशुलोक थे। अब पशुलोक संवर्ग को समाप्त करके गढ़वाल संवर्ग में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा लेखा एवं आशुलिपिक पद को समाप्त कर दिया गया है।

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