पतंजलि के पांच सैंपल हुए फेल, 11 लाख जुर्माना
हरिद्वार : मिथ्या छाप (मिस ब्रांडिंग) एवं भ्रामक प्रचार के पांच मामलों में दोषी पाए जाने पर एडीएम हरिद्वार (न्याय निर्णायक अधिकारी) ने पतंजलि आयुर्वेद की पांच उत्पादन यूनिटों पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पतंजलि को जुर्माने की यह धनराशि एक महीने के अंदर जमा करानी होगी। साथ ही भविष्य में सुधार न करने पर जिला खाद्य सुरक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह आदेश एक दिसंबर 2016 को दिया।
इस मामले से जुड़े नमूने 16 अगस्त 2012 को लिए गए थे। जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से हरिद्वार प्रभारी योगेंद्र पांडेय ने कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर से पतंजलि द्वारा उत्पादित बेसन, शहद, कच्ची घानी का सरसों का तेल, जैम एवं नमक के सैंपल भरे थे। जिन्हें जांच के लिए रुद्रपुर लैब में भेजा गया था।
रिपोर्ट में उत्पादों के सैंपल फेल पाए गए। इसे लेकर जिला खाद्य सुरक्षा विभाग ने एडीएम कोर्ट में वर्ष 2012 में वाद दायर किया था। पिछले चार सालों से कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान पतंजलि की ओर से भी तथ्य रखे गए, जिन्हें कोर्ट ने अपर्याप्त मानते हुए फैसला सुनाया।
कोर्ट ने माना कि पंतजलि जिन उत्पादों को अपनी यूनिटों में उत्पादित बताकर उनके लेबल पर बेच रही थी, वह किसी दूसरी यूनिटों में बने थे। यह सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम-2006 की धारा 52-53 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (पैकेजिंग एंड लेबलिंग रेग्यूलेशन-2011) की धारा 23.1(5) का उल्लंघन है।
इस पर एडीएम डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने कच्ची घानी सरसों के तेल का सैंपल फेल होने पर 2.50 लाख का जुर्माना, नमक पर 2.50 लाख, पतंजलि जैम पर 2.50 लाख, बेसन पर 1.50 लाख और शहद का सैंपल फेल होने पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह सभी उत्पाद पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ट्रेडिंग यूनिट डी-28 ओल्ड इंड्रस्टीज हरिद्वार, पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड यूनिट-3 पदार्था लक्सर, मैन्यूफैक्चर्ड एवं मार्केटिंग यूनिट-3, पतंजलि एवं हर्बल पार्क पदार्था लक्सर में उत्पादित किए जाने की बात कही गई थी।
इस तरह इन सभी यूनिटों पर कुल 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इस संबंध में पंतजलि आयुर्वेद का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, मगर सफलता नहीं मिली। पंतजलि का पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।