UTTARAKHAND

बगावत चरम पर कांग्रेस तीन नेताओं सजवाण, आर्येन्द्र शर्मा व शिल्पी ने छोड़ी पार्टी

शिल्पी अरोड़ा ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, किच्छा से निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव

देहरादून । टिकट आवंटन के बाद उठी बगावत को थामने के लिए कांग्रेस की डैमेज कंट्रोल की कवायद को झटका देते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण और पार्टी के दो प्रदेश महामंत्री आर्येन्द्र शर्मा और शिल्पी अरोड़ा ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। तीनों नेता चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस को राजनीति के पूरे पांच दशक देने वाले सजवाण ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर देवप्रयाग से पर्चा दाखिल कर दिया है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1962 में इंदिरा गांधी की वानर सेना के अध्यक्ष के रूप में की थी। बुधवार को सजवाण ने देवप्रयाग में एक पत्रकार वार्ता में कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की।

वहीँ लंबे समय से किच्छा में महिलाओं के लिए काम कर रही कांग्रेसी नेत्री शिल्पी अरोड़ा ने किच्छा से कांग्रेस का टिकट न मिलने पर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें हरीश रावत से अपनी जान का खतरा है, उन्होंने ही पिछले चुनाव में उनका टिकट कटवाया था। उन्हें बार-बार वह कमजोर प्रत्याशी बता रहे थे। गदरपुर से उस कांग्रेसी नेता को चुनाव मैदान में उतार दिया जिसने पिछले चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी पर हमला किया था, जबकि उसे छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। रोते हुए शिल्पी ने कहा कि वह हरीश रावत के खिलाफ किच्छा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडे़ंगी। उन्होंने कहा कि हरीश रावत व कुमायूं की नौ सीटों पर कांग्रेस को हराने के बाद ही दम लूंगी।

उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदेश महामंत्री पद से अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भेज दिया है। शिल्पी ने कहा कि पिछले बारह वर्षों से लगातार समर्पित कार्यकर्ता की तरह पार्टी की सेवा करती आ रही है और उधधमसिंहनगर में महिलाओं के सम्मान एवं विकास के द्वारा पार्टी को बहुत मजबूती दी है, लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पार्टी को अब जमीनी एवं समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति विशेष के द्वारा विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण में जो धांधलेबाजी की गई है वह अब जगजाहिर हो चुकी है। उन्होंने अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के प्रदेश महामंत्री व कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि वह अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किच्छा से चुनाव लडे़ंगी।

उनका कहना है कि एक ऐसे व्यक्ति विशेष जो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं उन्होंने महिलाओं के खिलाफ मेरा टिकट काटकर जो अपमान किया है उसका खामयाजा उसको भुगतना पडे़गा। उन्होंने जातिवाद एवं क्षेत्रवाद के आधार पर टिकट वितरण का विरोध किया। उनका कहना है कि हरीश रावत किच्छा विधानसभा से चुनाव लड़कर 16 समर्पित एवं कददावर पार्टी उम्मीदवारों का हक मारकर चुनाव लड़ रहे हं,ै जिसका उन्हें चुनाव में खामियाजा भुगतना पडेगा। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्राी हरीश रावत अपनी बेटी के लिए हरिद्वार से टिकट मांग सकते हैं तो वह उन्हें दूसरी बेटी के लिए क्यों टिकट नहीं मांगा। उनका कहना है कि क्या एक सक्षम, उद्यमी एवं आत्मनिर्भर महिला को क्यों टिकट से वंचित रखा, यह इस बात का सबूत है कि हरीश रावत को पार्टी के पदाधिकारियों व महिलाओं की कोई चिंता नहीं है।

devbhoomimedia

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