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गज़ब : जॉलीग्रांट से टैक्सी छोड़ती तो एक तरफ लेकिन किराया लेती दोनों तरफ का

देश के सभी हवाई अड्डों से गंतव्यों तक पहुँचाने का किराए की तुलना में यहाँ वसूलते हैं भाड़ा दो-गुना 

जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाए बैठे टैक्सी यूनियन और प्रशासन की मिली भगत से लूट रहे तीर्थ यात्री और पर्यटक 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : जॉली ग्राण्ट एयरपोर्ट के टैक्सी वाले हवाई यात्रा करने वाले लोगों को छोड़ते तो एक तरफ हैं और किराया लेते हैं दोनों तरफ का। जी हाँ यदि आप इस बात से सहमत न हों तो दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और देश के अन्य हवाई अड्डों से किराये पर ली जाने वाली टैक्सी के किराये से कभी तुलना जरूर करें। कि क्या जॉली ग्राण्ट एयर पोर्ट से देहरादून का किराया साढ़े आठ सौ रूपये होना चाहिए जबकि यह दूरी मात्र 25 से 28 किलोमीटर ही है। जबकि मुम्बई के संता क्रूज़ हवाई अड्डे से नवी मुंबई के बेलापुर का किराया भी इतना ही है जबकि दूरी लगभग इसके दो गुनी। ठीक इसी तरह नई दिल्ली के पालम या यूँ कहें इंदिरा गाँधी एयर पोर्ट से चाणक्य पुरी तक टैक्सी भाड़ा 250 रूपये ही है जबकि दूरी लगभग 20 किलोमीटर। ठीक इसी तरह देश के अन्य महानगरों के आस-पास के हवाई अड्डों से भी महानगर तक पहुँचने का किराया है। लेकिन देहरादून जिले के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाए बैठे टैक्सी यूनियन देश विदेश से आने वाले पर्यटकों और यात्रियों की जेब काटने पर आमादा है। यह बात अब तक सामने इसलिए नहीं आई कि इस राज्य के नीति -नियंता और नेता शायद ही कभी अपने जेब से पैसा खर्च कर जॉली ग्राण्ट हवाई अड्डे से देहरादून या ऋषिकेश आए हों। ऐसे में सरकारी गाड़ियों से एयरपोर्ट आने जाने वाले अधिकारी और नेताओं को आम जनता की जेब कटे या बचे से क्या लेना देना। 

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून के पास स्थित इस हवाई अड्डे पर टैक्सी यूनियन के लोगों ने अपनी टैक्सियां खड़ी करने के लिए पार्किग तक पर कब्जा जमाया व है।  जबकि देश के किसी भी हवाई अड्डे पर इस तरह की व्यवस्था नहीं है कि टैक्सियां एयरपोर्ट ऑथोरटी की चहारदीवारी के भीतर पार्क की जाती हों।  देश के अन्य हवाई अड्डों में टैक्सियों का स्टैंड हवाई अड्डे की चहारदीवारी से बाहर है और टैक्सी के लिए जो स्थान हवाई अड्डे को संचालित करने वाली कंपनी ने नियत किया हुआ है वहीँ पर बूथ बनाकर यात्री के आने पर टैक्सी बूथ से टैक्सी बाहर से बुलाई जाती है ताकि टर्मिनल पर भीड़ -भाड़ न हो, जबकि यहां अंदर तो एक बूथ है ही वहीं टर्मिनल के बाहर टैक्सियों का जमघट लगा रहता है वह भी बेतरतीब तरीके से जिससे आने जाने वाले यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबकि यहाँ पर बाहर से आने वाली गाड़ी को एयरपोर्ट पर यात्री उतारने के लिए मात्र 10 मिनट का समय निःशुल्क निर्धारित है , जबकि इसके बाद एयरपोर्ट के गेट पर लगे बैरियर वाले वाहनों से मिनट के हिसाब से पैसा वसूलते हैं।

गौरतलब हो कि पहले यह हवाई अड्डा छोटा था और यहाँ सीमित उड़ाने ही आती थी, लेकिन अब इस हवाई अड़े पर सुबह से शाम तक देश के कोने-कोने से जुड़ने वाले तमाम फ्लाइट्स आती है ऐसे में अब धीरे-धीरे एयर पोर्ट का भी विस्तार किया जा रहा है और एयरपोर्ट पर निजी वाहनों की कतार और उन्हें पार्किंग करने की समस्या इस टैक्सी यूनियन की पार्क टैक्सियों के कारण होने लगी हैं। स्थानीय लोग यदि सुबह की फ्लाइट से दिल्ली और शाम की फ्लाइट से वापस आते हैं तो उनके लिए अपने निजी वाहन पार्क करने में भारी असुविधा होती है, क्योंकि पार्किंग के लिए एयर पोर्ट ऑथॉरटी द्वारा नियत स्थान पर टैक्सियों ने कब्जा जमाया हुआ है। 

ऐसा नहीं कि यह समस्या एयरपोर्ट ऑथॉरटी सहित जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस प्रशासन के संज्ञान में नहीं यही लेकिन इनकी टैक्सी यूनियन वालों से मिलीभगत के चलते वे टैक्सी यूनियन के खिलाफ कार्रवाही करने से बचते रहे हैं।  हालाँकि सूत्रों ने यह भी बताया यही कि इससे पहले जब एयरपोर्ट टर्मिनल के विस्तारीकरण का काम शुरू हुआ था एयरपोर्ट ऑथॉरटी ने एयरपोर्ट की सीमा से टैक्सी स्टैंड बाहर करने की बात कही थी , लेकिन तब स्थानीय छुटभैया नेताओं के दबाव के बाद टैक्सी यूनियन को परमिसेस से बाहर खदेड़े जाने का मामला ठन्डे बस्ते में चला गया। 

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