AGRICULTURE

हिमाचल में जल प्रबंधन और कृषि के लिए 80 मिलियन डॉलर की परियोजना

दस जिलों के चार लाख से अधिक किसानों को मिलेगा लाभ
428 ग्राम पंचायतों में लागू की जाएगी परियोजना

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नई दिल्ली। भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और विश्व बैंक ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश में कुछ चयनित ग्राम पंचायतों (ग्राम परिषदों) में जल प्रबंधन प्रक्रियाओं में सुधार लाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध पर्वतीय राज्य है।

हिमाचल प्रदेश में स्रोत स्थिरता और वर्षा-आधारित कृषि के लिए एकीकृत परियोजना 10 जिलों की 428 ग्राम पंचायतों में लागू की जाएगी, इससे 4,00,000 से अधिक छोटे किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को लाभ होगा।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में अपर सचिव समीर कुमार खरे ने कहा, “हम भारत में जलवायु-स्मार्ट कृषि प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करते हैं। किसानों को अपने भूगोल और जलवायु के लिए मुफीद कृषि प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी। एक पर्वतीय राज्य के रूप में, हिमाचल प्रदेश जलवायु परिवर्तन और संबंधित जोखिमों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। इस परियोजना के तहत सतत जल प्रबंधन प्रक्रिया किसानों की आय को दोगुना करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकती है। यह लक्ष्य भारत सरकार ने निर्धारित किया है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि जल-उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए सभी उपलब्ध तकनीक और संसाधनों का सबसे अच्छा उपयोग किया जाए।

भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में अपर सचिव समीर कुमार खरे और विश्व बैंक की ओर से भारत के कंट्री डायरेक्टर जुनैद कमाल अहमद ने इस ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। जबकि, हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव (वन) राम सुभाग सिंह तथा विश्व बैंक की ओर से कंट्री डायरेक्टर जुनैद कमाल अहमद ने इस परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए।

हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की सुविधा नहीं है। कृषि उत्पादन और स्नोलाइन्स पहले ही उच्च ऊंचाई पर स्थानांतरित हो गए हैं, जिससे परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश के सेब सहित अन्य फलों के उत्पादन पर असर पड़ा है। जलवायु परिवर्तन से भी औसत तापमान बढ़ने और तराई क्षेत्रों में वर्षा कम होने की संभावना है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान और वर्षा दोनों के बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कारण बाढ़ की घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। परियोजना से वनों, चारागाहों और घास के मैदानों में अपस्ट्रीम जल स्रोतों में सुधार होगा।

वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री और परियोजना के लिए विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर क्रिस्टोफर पॉल जैक्सन ने कहा कि डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में कृषि और जल उत्पादकता बढ़ेगी। इस तरह के प्रयास से वन क्षेत्र, जल गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने, भू-क्षरण को कम करने और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिसमें महिलाओं, युवाओं और वंचित समूहों को भी शामिल किया जाएगा। इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) के इस 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण की अंतिम परिपक्वता 14.5 वर्षों की है जिसमें पांच वर्षों की अनुग्रह अवधि भी शामिल है।

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