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अयोध्या में राम मंदिर का रास्ता साफ

आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता

देवभूमि मीडिया ब्यूरो

मुख्यमंत्रीश्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अयोध्या में रामजन्म भूमि पर मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दियेजाने वाले निर्णय को सकारात्मक रूप से लेने की प्रदेशवासियों से अपील की है।उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की गलत बयानबाजी एवं अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश शांति प्रियप्रदेश है। हमे हर प्रयास से आपसी सौहार्द बनाये रखना होगा। इस सम्बन्ध मेंउन्होंने सभी से सकारात्मक सोच के साथ आपसी सहयोग की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री नेकहा कि प्रदेश में इसके दृष्टिगत व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किये गये है।

नई दिल्ली । अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुना ते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है । जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में अलग जगह पर पांच एकड़ जमीन देने के लिए कहा है।

देश के सबसे सीनियर पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया है. कोर्ट ने फैसले में कहा है कि विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक है। जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी । बेंच ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया

है।
कोर्ट ने फैसले में कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि फैसला कानून के आधार पर ही दिया जाएगा। इसके अलावा कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है ।

इसके अलावा कोर्ट ने सरकार को 3 महीने के अन्दर राम जन्म भूमि के लिए एक ट्रस्ट बनाने के निर्देश जारी किये है। इस मामले में मुस्लिम पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे वकील जफ़रयाब जिलानी ने कहा कि कोर्ट के फैसले से निराश हैं लेकिन फैसले का सम्मान करते है।

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