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भाजपा में टिकटों की बन्दरबांट

गैर उत्तराखंडी भाजपा नेता का मन मुख्यमंत्री बनने के लिए मार रहा कुलांचे 

रामलाल , शिवप्रकाश व संजय कुमार की तिकड़ी कहीं भाजपा को ही न दे दे लंगड़ी

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून  :  उत्तराखण्ड भाजपा के भीतर से जिस तरह के टिकट वितरण के संकेत मिल रहे हैं उससे साफ संकेत होता है कि सभी क्षत्रपों को साधने की कोशिश की जा रही है। उत्तराखण्ड के भाजपाइयों के निशाने पर राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश हैं। अनुशासन में बँधी बीजेपी की कार्यप्रणाली के कारण कार्यकर्त्ता भले ही कुछ न कह पायें किन्तु टिकट सूची के बाद शिवप्रकाश और राज्य भाजपा के संगठन मंत्री संजय कुमार निशाने पर होंगे। इन दोनों को राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल का मजबूत आशीर्वाद प्राप्त है।

राज्य के तीनों पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय से हाशिये पर हैं। उन्हें किसी को टिकट दिलाने की स्थिति में भले ही न रखा गया हो किन्तु सूची फाइनल होने के अंतिम चरण में उनके एकाध टिकट पर सुनवाई जरूर हुयी है । जनरल खंडूड़ी अपनी बेटी को टिकट दिलाने में सफल रहे तो साथ ही हरक सिंह रावत को लैंसडौन से कोटद्वार भेजकर एक तीर से दो निशाने कर दिये, एक तो उनकी नापसन्द शैलेन्द्र रावत का टिकट कटा साथ ही हरक को कोटद्वार तक सीमित कर दिया। भले ही सूची की औपचारिक घोषणा बाकी है किन्तु जो संकेत मिल रहे हैं वे बड़े रोचक हैं।

रामनगर शहर के निकट एक गांव के प्रधान को जनरल खण्डूरी की कृपा से टिकट तय हो चुका है। भगत सिंह कोश्यारी अपनी मूल सीट कपकोट से केंद्र के अनेक नेताओं के कृपापात्र भूपेश उपाध्याय का टिकट कटवाने में कामयाब रहे हैं, साथ ही उनके नजदीकी महेश नेगी को द्वारहाट से टिकट दिए जाने की चर्चा है। कोश्यारी कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीजेपी में आने के संकेत दे चुके थे ।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा है कि अंतिम क्षणों में कांग्रेस से यशपाल आर्य अपने पुत्र के साथ भाजपा में एंट्री ले सकते हैं सूत्रों के अनुसार वे अपने लिए बाजपुर और बेटे के लिए नैनीताल सीट मांग रहे हैं। एन डी तिवारी के पुत्र की भी लालकुआं से टिकट की चर्चा है।

डॉ रमेश पोखरियाल निशंक अपने पीआरओ रहे मनवीर चौहान के लिए यमुनोत्री से टिकट मांग रहे हैं। वे कर्णप्रयाग से अनिल नौटियाल, केदारनाथ से आशा नौटियाल और लालकुआं से हेमन्त द्विवेदी के लिए भी प्रयासरत हैं।
चर्चाओं के अनुसार निशंक धर्मपुर सीट के लिये उमेश अग्रवाल के साथ दिख रहे हैं जबकि मेयर विनोद चमोली सबसे मजबूत स्थिति में हैं। गाहे बगाहे शिव प्रकाश के उत्तराखण्ड के सीएम बनने की इच्छा की चर्चा होती रही है, इसके पीछे स्थानीय लोगों का तर्क है भाजपा जब हरियाणा के स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी को सूबे का पहला मुख्यमंत्री बना सकती है तो शिवप्रकाश तो उत्तरप्रदेश से हैं।

रणनीतिकारों का कहना है वे टिकटों को इसी कसौटी पर कस रहे हैं। उनकी हनक के सामने सब बौने है।  चर्चा तो यहाँ तक है कि रामनगर के पूर्व विधायक दीवान सिंह का मजबूत आधार के बाद भी टिकट खतरे में है वहीँ राज्य बनने के बाद लगातार तीन बार हार चुके रघुनाथ सिंह चौहान अल्मोड़ा सीट से टिकट के एकदम निकट हैं।

पूर्व संगठन मंत्री संजय भाई जोशी आज भाजपा में प्रासंगिक नहीं हों किन्तु उनका यहाँ संगठन पर गहरा प्रभाव है उनके निकटस्थ विनोद कंडारी का देवप्रयाग से टिकट लगभग तय माना जा रहा है, जोशी के आशीर्वाद से कण्डारी युवा मोर्चा की राष्ट्रीय टीम में भी रहे। अभी सूची जारी होने के बाद ही ज्ञात होगा कि हरीश रावत को पटखनी देने के लिए भाजपा ने क्या रणनीति बनाई है।

उत्तराखण्ड भाजपा की प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। प्रत्याशियों का पैनल, सर्वे, कार्यकर्ताओं से रायसुमारी, संघ की रिपोर्ट आदि सभी रस्साकस्सी मजाक बन कर रह गयी हैं, क्षत्रपों को खुश करने में कार्यकर्ताओं की नाराजगी का रणनीतिकारों को शायद अंदाजा नहीं है। यह तो आज प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

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