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उत्तरैणी कौतिक ने लोकगायक पप्पू कार्की की माता का किया सम्मान

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नयी दिल्ली : कुमाऊँ सांस्कृतिक कला मंच बुराड़ी दिल्ली केतत्वावधान में  गायक कैलाश एवम कुन्दन सिह कोरंगा  के निर्देशन में  उत्तराखण्ड के लोकप्रिय कलाकारों द्वारा सुप्रसिद्ध गीत लेखक ,गीत रचियता जीत सिह नेगी और एवं लोकगायक स्वर्गीय पप्पू कार्की जी द्वारा संगीतबद्ध मधुर गानो पर आधारित कार्यक्रम *उत्तरान्चल गीतमाला में  कई गाने गाये गए।

इस अवसर पर स्वर्गीय पप्पू कार्की जी की माता जी को संस्था के संस्थापक गिरीश जोशी,खीम सिंह रावत एवम उत्तरायणी राष्ट्रीय पर्व के सूत्रदार नन्दन सिंह रावत, डी आई जी भगत सिंह टोलिया ,बेतालघाट विकास समिति के सुरेंदर सिंह हलसी,ने अंग वस्त्र,परितोषित राशि,देकर सम्मानित किया गया इस अवसर पर हज़ारों की संख्या में पहुचे दर्शको ने गीतमाला का आनंद लिया। 
कुमाऊँ सांस्कृतिक कला मंच बुराड़ी दिल्ली द्वारा लगातार 22 वी उत्तरायणी की वजह से दिल्ली सरकार में चेतना जागी ओर उत्तरायणी को कुछ जगह सरकारी सहायता मिलने लगी,ओर पूरे दिल्ली एनसीआर में उत्तरायणी की धूम हो गयी महोत्सव मे,

इस भव्य आयोजन में हमारी भाषा, साहित्य, संस्कृति और उत्सवों को संजोए रखने का आह्वान किया । मंच से संचालन कर रहे संस्था के संस्थापक श्री गिरीश जोशी जी खीम सिंह रावत जी ने इस अवसर पर उतरैणी के महत्व पर भी प्रकाश डाला उत्साहित नवयुवाओं को संदेश दिया की अपने पारम्पारिक पर्व उत्तरायणी,घुघतिया की क्या महत्वता है कैसे मनाया जाता है,इसका क्या उद्देश्य है

13 जनवरी 1921 को बागेश्वर के उतरैणी कौतिक में कुमाऊँ केसरी बद्रीदत्त पांडे जी की हुंकार पर “कुली बेगार” के रजिस्टरों को सरयू-गोमती के संगम में बहा दिया गया और उत्तराखंड के लोगों ने कुली बरदायस से हमेशा -हमेशा के लिए मना कर दिया । अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर लोगों के मर-मिटने के जोश और जज्बे को देखकर गोली नहीं चला सका ।

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