भ्रष्टाचार और रिश्वत के मामलों में आरोपित अधिकारियों को तय समय से पहले किया रिटायर
देवभूमि मीडिया ब्यूरो
नई दिल्ली : भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों में एक हफ्ते पहले दर्जनभर आयकर अधिकारियों की नौकरी से छुट्टी करने के बाद अब केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार का सामना कर रहे सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के 15 अफसरों को जबरन सेवामुक्त कर घर भेज दिया है। इन अधिकारियों में असिस्टेंट कमिश्नर से लेकर प्रिंसिपल कमिश्नर तक शामिल बताये गए हैं।
वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार, फंडामेंटल रुल्स के रूल 56 (जे) के तहत सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) के इन अफसरों को हटाया है। इनमें से कुछ पहले से ही निलंबित थे। कुछ के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं जबकि कई अन्य पर रिश्वतखोरी, वसूली और आय से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप हैं।
सेवा से मुक्त किए गए अफसरों में दिल्ली में तैनात सीबीआइसी के प्रिंसिपल एडीजी (ऑडिट) अनूप श्रीवास्तव भी शामिल हैं। श्रीवास्तव के खिलाफ सीबीआइ ने 1996 में एक हाउसिंग सोसायटी को फायदा पहुंचाने के संबंध में आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया था। 2012 में भी अनूप के खिलाफ ड्यूटी चोरी के मामले में आयातक से घूस लेने का आरोप है। उन पर मनमाने ढ़ंग से गिरफ्तारी, उत्पीड़न के भी आरोप है।
वहीं संयुक्त आयुक्त नलिन कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति समेत कई मामले दर्ज हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इन अफसरों की आयु 50 साल हो गई है, इसलिए जनहित में इन्हें जबरन रिटायर किया गया है।
’कोलकाता में तैनात कमिश्नर संसार चंद भी कथित तौर पर रिश्वतखोरी में लिप्त था। चेन्नई के कमिश्नर जी. श्री हर्षा ने आय के ज्ञात स्रोतों से 2.24 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा कर रखी थी। दोनों अफसरों को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया था।
निलंबन में चल रहे कमिश्नर रैंक के दो अधिकारी अतुल दीक्षित और विनय बृज सिंह को भी सेवा मुक्त किया गया है। हटाए गए अफसरों में दिल्ली जीएसटी जोन के डिप्टी कमिश्नर अमरेश जैन के पास आय से 1.55 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति है।
सेवा मुक्त अन्य अफसरों में एडिशनल कमिश्नर अशोक महीदा (डीजी सिस्टम्स कोलकाता), एडिशनल कमिश्नर वीरेंद्र अग्रवाल, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस पाबना (निलंबित), एसएस बिष्ट (भुवनेश्वर जीएसटी जोन), बिनोद सांगा (मुंबई जीएसटी जोन), राजू सेकर (विशाखापत्तनम जीएसटी जोन), मोहम्मद अल्ताफ (इलाहाबाद),डिप्टी कमिश्नर अशोक अस्वाल (लाजिस्टिक महानिदेशालय दिल्ली) शामिल हैं।