UTTARAKHAND

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जन्मदिवस पर प्रदेशभर में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम

स्वच्छ राजनीति के साथ ही कलम के भी धनी हैं सीएम त्रिवेंद्र

कहीं उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करते हुए देश प्रदेश की खुशहाली के लिए हुई प्रार्थना

तो कहीं उनके ईमानदार नेतृत्व और उत्तराखंड विकास के नए आयामों पर हुई परिचर्चाएं 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जन्मदिवस पर जहां प्रदेशभर में कई स्थानों पर कई कार्यक्रम और परिचर्चाएं हुई वहीं भारतीय जनता पार्टी जिला देहरादून द्वारा मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के जन्मदिवस पर जिला देहरादून के सभी 17 मंडलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए रानीपोखरी मंडल के थानों में बाला सुंदरी मंदिर में जिला अध्यक्ष श्री शमशेर सिंह पुंडीर जी व कार्यकर्ताओं ने हवन कर मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करते हुए देश प्रदेश की खुशहाली के लिए भी प्रार्थना की। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्री शमशेर सिंह पुंडीर ने कहा कि श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के ईमानदार नेतृत्व में आज उत्तराखंड विकास के नए आयामों को छू रहा है उनके परिश्रम और अनुभव का लाभ आमजन को मिल रहा है ।
डोईवाला माजरी ग्रांट ,चकराता, विकास नगर ,ऋषिकेश, हरबर्टपुर, सहसपुर ,कालसी सहित सभी मंडलों में फल वितरण, कंबल वितरण, खेल सामग्री वितरण, हवन ,यज्ञ, कीर्तन आदि कार्यक्रम किए गए। महिला मोर्चा द्वारा विभिन्न स्थानों पर कीर्तन व युवा मोर्चा सहित सभी मोर्चों ने भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए।
इन कार्यक्रम में महामंत्री अरुण मित्तल, सुदेश कंडवाल जिला मीडिया प्रभारी संपूर्ण सिंह रावत, नगीना रानी अमित डबराल,राजाराम, राजेश जुगलान मंडल अध्यक्ष विनय कंडवाल दिनेश सती, राजेंद्र मनवाल, सरदार राजकुमार अरविंद चौधरी गणेश रावत दिनेश कौशिक अनुज गुलेरिया, अमर सिंह चौहान गौरव चावला मोहन पेटवाल दीवान सिंह रावत,नीरज चौहान ,विनोद कश्यप, प्रदीप नेगी,रचिता ठाकुर, विनोद लक्खा राम बहादुर छेत्री नरेंद्र सिंह रावत सहित सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादूनः प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारिता की दीक्षा भले ही तीन दशक पूर्व ली हो, और अब वह राजनीति के पगडंडियों से होते हुए एक बड़े फलक की ओर बढ़ गए हों, लेकिन उनकी कलम की धार और निखार किसी पेशेवर साहित्य साधक से कम नहीं है। हाल ही में अखबारों में छपे किसानों के मसले पर उनके लेख की सारगर्भिता और सर्वग्राह्यता ने साफ कर दिया है कि वह जनपक्षधरता की राजनीति के साथ ही कलम के भी बहुत धनी हैं।

आजकल किसान आंदोलन चल रहा है। देशभर के कलमकार अपनी टिप्पणियां इस पर दे रहे हैं। साहित्य से लेकर राजनीति तक हर कोई अपने ही चश्मे से इस आंदोलन को देख रहा है। मामला एक है लेकिन चश्मे अलग अलग। ऐसे में भ्रम की स्थितियां समाज के सामने बनती नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया संक्रमण के इस काल में भ्रम के साथ अनाप शनाप बातें फैलाई जा रही हैं। सोशल मीडिया की इन्हीं भ्रमिम करती हवाओं में लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ यानी पत्रकारिता का क्षेत्र भी का भ्रमित होना स्वाभाविक सी बात है। लेकिन हाल में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत किसान आंदोलन पर अपनी जो कलम चलाई है उससे कई चीजें साफ और समझने में आसान हो जाती हैं। उम्मीद की जानी चाहिए मुख्यमंत्री की जनपक्षीय कलम के मायने बेहतर ढंगे से समझे जा सकेंगे।

अमर उजाला प्रभाव पेज पर ‘किसानों के हित सर्वोपरि’ हैडिंग के साथ सीएम त्रिवेंद्र का यह लेख प्रकाशित हुआ है। लेख सागर्भित है और सर्वग्राही भी। इसमें देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उस कार्यशैली का जिक्र किया गया है जिसे दुनिया भी न भूतो ना भविष्यति की तरह देख रही है। सीएम का मानना है कि केंद्र में जब से मोदी की सरकार आई है किसानों के हित सर्वोपरि रहे हैं। यहां उन्होंने किसान आंदोलन के पीछे से काम कर रही अराजक ताकतों का भी जिक्र किया है। सीएम ने लाॅकडाउन में चरमराती अर्थव्यवस्था में किसान के पसीने को संजीवनी की तरह बताया है। तो यह भी साफ किया कि सरकार किसानों की पक्षधर है।

तीन कृषि कानून जिन्हें वापस लेने की बात आंदोलन में हो रही है, उन पर भी रोशनी डाली गई है। सीएम ने अपने लेख में एमएसपी, कांटेक्ट फार्मिंग व मंडी कानून का बहुत ही आसान शब्दों में बेहतर ढंग से विश्लेषण किया है। उन्होंने अपने लेख में किसानों के भ्रम को दूर करने का भी बेहतर प्रयास किया है।

लेख में पंजाब की बात है तो हरियाणा उत्तराखंड की भी है। जब से मोदी जी ने देश की सत्ता संभाली यानी बीत छह सालों में किसानों के बजट पर उन्होंने लिखा कि इससे पहले देश में किसानों के लिए 12 हजार करोड़ का बजट था। मोदी जी ने इसे बढ़ाकर 1 लाख 34 हजार कर दिया। बेहद खूबसूरती से उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश में हुए किसानों के गन्ना भुगतान का भी जिक्र किया है। जो निश्चित रूप से उनकी किसान हित में बड़ी उपलब्धि भी है। साथ ही किसानों के लिए ब्याज मुक्त ऋण का भी जिक्र उन्होंने अपनी कलम के जरिए किया।

बेहद सटीक अंदाज से चली मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कलम के संदेश का किसानों पर असर तो होगा ही। भाषा, साहित्य और जनपक्षधरता की कलम पर उनकी पकड़ उनके व्यक्तित्व को और भी निखार देती है।

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