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रेफर पर रेफर और फिर वेंटिलेटर के ”खेल” में उलझती गरीब पहाड़ी प्रसव पीड़ित महिलाएं  

प्रसव पीड़ा से तड़पती रही महिला हर अस्पताल ने इलाज़ से झाड़ा पल्ला

230 किलोमीटर बाद हुआ एक निजी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल है यह बताने के लिए यह घटना काफी है जब चमोली जिले के लंगासू चमोली से लेकर देहरादून तक के 230 किलोमीटर चलने के बाद एक प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को बमुश्किल स्वास्थ्य सुविधा मुहैया हो पायी।  हालाँकि इसे भगवान् का शुक्र कहा जा सकता है कि देहरादून पहुँचने पर महिला का सुरक्षित प्रसव भी हुआ और अब जच्चा -बच्चा दोनों की जान भी बच गयी। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार को चमोली जिले के लंगासू गांव निवासी लखपत असवाल की पत्नी लक्ष्मी देवी (28 वर्ष) को तब प्रसव पीड़ा शुरू ही हुई तो उसके परिजन उसे क्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल ले गए। लेकिन, हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे आगे के हॉस्पिटल को रेफर कर दिया।

पीड़िता के परिजन महिला को लेकर श्रीकोट (श्रीनगर) मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। लेकिन, वहां भी डॉक्टरों ने वेंटिलेटर वहां भी उपलब्ध न होने की बात कहते हुए उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया और महिला को ऋषिकेश एम्स के लिए रेफर कर दिया। लेकिन AIIMS में भी वेंटिलेटर उपलब्ध न होने पर डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया और आगे हिमालयन हॉस्पिटल रेफर कर दिया।

रेफर करने और वेंटिलेटर उपलब्ध न होने का खेल यहीं ख़त्म नहीं हुआ यहाँ से भी महिला के परिजन रात करीब 10 बजे परिजन उसे दून के एक बड़े निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन यहां रेफर करने और वेंटिलेटर से इतर एडवांस जमा करने की बात सामने आयी और कहा गया पैसे जमा होने के बाद ही इलाज शुरू होगा, लेकिन परिजनों के पास इतना रुपये नहीं था। देर रात कुछ सामाजिक लोगों के हस्तक्षेप पर अस्पताल प्रबंधन ने बमुश्किल प्राथमिक उपचार शुरू किया। लेकिन, यहाँ भी मामला गंभीर होने की बात और रेफर और वेंटिलेटर का ”खेल” शुरू हुआ और प्रसव पीडिता को एक बार फिर आगे की तरफ रेफर कर दिया गया। थक हारकर गरीब महिला के परिजन प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को लेकर पटेलनगर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। जहाँ पहुंचकर महिला को सुरक्षित प्रसव भी हुआ और जच्चा-बच्चा अब दोनों स्वस्थ हैं।

देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में मैसेज उन्हें भी मिला है, लेकिन कोई शिकायत नहीं मिली है। टीम भेजकर जांच की जाएगी।

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