UTTARAKHAND

टिकट न मिलने से नाराज भाजपाइयों न अपनाए बगावती तेवर, निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान धनीलाल शाह ने प्रेस के सामने फूट-फूटकर रोये 

देहरादून । भारतीय जनता पार्टी के उत्तराखंड प्रत्याशियों की जारी सूची पर जहां टिकटार्थी कई नेताओं ने पार्टी छोडकर निर्दलीय चुनाव लडने की घोषणा की है वहीं सहसपुर सीट से दावेदारी कर रहीं बीजेपी नेता लक्ष्मी अग्रवाल ने भी टिकट का ऐलान होने के बाद नाराजगी जाहिर करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। घनसाली विधानसभा से भाजपा के एक और दावेदार ने टिकट ना मिलने पर पार्टी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है।

घनसाली से भाजपा ने धनीलाल शाह ने भाजपा पर उनके साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। धनीलाल शाह ने धनसाली नें मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी ने उनकी अनदेखी की है। धनीलाल शाह ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए कहा कि वे चुनावी मैदान में निर्दलीय ताल ठोकेंगे और चुनाव जीतेंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान धनीलाल शाह ने प्रेस के सामने फूट-फूटकर रोते हुए अपनी बात कही। ऐसे में सवाल उठ रहा है, कि जब पहली सूची में ये हाल है तो जिन 6 सीटों पर पेंच फंसा है, वहां के उम्मीदवारों के नामों के ऐलान के बाद हालात क्या होंगे। वही राजपुर विधानसभा क्षेत्रा के कई टिकटार्थियों ने इसी क्षेत्र में बने पार्टी के प्रदेश कार्यालय बलबीर रोड पर जमकर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि क्षेत्र से बाहर के एक टिकटार्थी को उपकृत पार्टी ने इस सीट को अनावश्यक रूप से दांव पर लगा दिया है।

याद रहे, इस सीट से पिछली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लडे रवीन्द्र कटारिया कुछ ही मतों से कांग्रेस के राजकुमार से मात खा गये थे और उसके बाद भी अपनी सक्रियता के दम पर उन्हे आशा थी कि पार्टी उन्हे एक बार फिर रिपीट करेगी लेकिन पार्टी ने गढवाल की एक आरक्षित सीट से चुनाव लडकर कैबिनेट मंत्री तक पहुंचे खजान दास को टिकट दे दिया जबकि अन्य दावेदारों का आग्रह था कि इस क्षेत्र में निवास करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं में से ही किसी को टिकट दिया जाये। इनमें रवीन्द्र कटारिया,सरदार जीवन सिंह तथा अमर सिंह स्वेडिया के समर्थकों ने भाजपा प्रदेश कार्यालय पर धावा बोल कर वहां उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों का घेराव कर टिकट बदले जाने की मांग की और आशंका जताई कि जीत के माहौल में भी टिकट वितरण की गलती से यह सीट पार्टी गंवा देगी ।

कार्यालय पर उपस्थित उपाध्यक्ष तथा रणनीतिकार ज्योति प्रसाद गैरोला, महामंत्री नरेश बंसल, प्रवक्ता विनय गोयल आदि ने उत्तेजित कार्यकर्ताओं को समझाया कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने सब पक्षों को तोल-परख कर ही टिकट दिये हैं और इसके बाद भी किसी कार्यकर्ता को अन्यथा लगता है तो वह अपना पक्ष उचित मंच पर रखने को स्वतंत्र है। इस गहमागहमी के पूर्वानुमान पर पुलिस के चार-पांच जवाब पहले से भाजपा प्रदेश कार्यालय पहंुचे हुए थे। हालांकि एक टिकटार्थी डाक्टर बबिता सहोत्रा का कहना था कि उनका और उनके साथियों भगवत प्रसाद मकवाना, विपिन कुमार चंचल का आग्रह था कि क्षेत्र में सर्वाधिक जनसंख्या और मतदाता बाल्मिीकी समुदाय से हैं तो यहां का टिकट इसी समुदाय से दिया जाना चाहिये । बाकी पार्टी संचालन बहुत विद्वान, अनुभवी संगठनकर्ताओं के हाथ है और हम सब उनके निर्णय के साथ हैं ।

खुद डाक्टर सहोत्रा की मांग थी कि समाज का सबसे निचला वर्ग बाल्मिीकी है और उनमें से भी सबसे पिछडे स्थान पर बाल्मिीकि महिलायें है,इस नाते टिकट का पहला अधिकार उनका, डाक्टर सहोत्रा, का बनता था और इसी नाते उन्होने टिकट को आवेदन किया भी था। वे आशान्वित भी थी लेकिन टिकट नही मिला तो भी हम सब पार्टी के निर्णय के साथ है क्योकि पार्टी ने भी उन्हे भरपूर सम्मान दिया है। इस अवसर पर चुनाव आयोग संपर्क समिति अध्यक्ष पुनीत मित्तल, भाजपा मीडिया प्रभारी डाक्टर देवेंद्र भसीन, राजपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा मंडल अध्यक्ष उमा नरेश तिवारी, विशाल गुप्ता, माणिकनिधि शर्मा, हरीश नारंग, प्रताप सिंह रावत आदि भी थे।

devbhoomimedia

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