DEHRADUNUttarakhandUTTARAKHAND

शासकीय कार्यालयों हेतु सुरक्षा सुदृढ़ीकरण एवं मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का निर्धारण

शासकीय कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने एवं अप्रिय घटनाओं की रोकथाम हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू किये जाने के संबंध में।

उपर्युक्त विषय के सम्बन्ध में अवगत कराना है कि शासकीय कार्यालयों में प्रायः घटित होने वाली अप्रिय / हिंसक घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए इस तरह की घटनाओं की रोकथाम हेतु शासन द्वारा सम्यक विचारोपरान्त् एतद्वारा राजकीय कार्यस्थलों पर अधिकारियों/कर्मचारियों की सुरक्षा, बचाव एवं प्रवेश नियंत्रण हेतु तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) संलग्न कर प्रेषित की जा रही है।

 

02- इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि कृपया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार राजकीय कार्यस्थलों पर अधिकारियों / कर्मचारियों की सुरक्षा हेतु अग्रेत्तर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने का कष्ट करें।

 

राजकीय कार्यस्थलों पर अधिकारियों/कर्मचारियों की सुरक्षा, बचाव एवं प्रवेश नियंत्रण हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)।

 

1. उद्देश्य एवं प्रयोज्यताः-

 

1.1. कार्यस्थल पर बाहरी आक्रामकता, अनावश्यक दबाव अथवा हिंसा से लोक सेवकों को भौतिक एवं विधिक रूप से पूर्णतः सुरक्षित रखने हेतु एक सुदृढ़ सुरक्षात्मक तंत्र स्थापित करना।

 

1.2. यह उत्तराखण्ड के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में कार्यरत समस्त सरकारी कार्यस्थलों (निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, खंड विकास कार्यालयों, राजकीय शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों आदि) पर लागू होगी, जिस हेतु विभाग के सचिव द्वारा विभागीय आवश्यकतानुसार यथा संशोधनों सहित इसकी अधिसूचना पृथक से जारी की गई हो। जिन कार्यालयों में पूर्व से सुरक्षा की व्यवस्था विद्यमान है यथा सचिवालय / विधानसभा इत्यादि, उनमें यह मानक संचालन प्रक्रिया लागू नहीं होगी।

 

1.3. यह सुरक्षा प्रतिबंध एवं नियम आम जनमानस, निजी ठेकेदारों, जन-प्रतिनिधियों, उनके समर्थकों तथा व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSO) सहित समस्त आगंतुकों पर बिना किसी अपवाद के लागू होंगे।

 

1.4. विभाग के सचिव सुरक्षा खतरों के आधार पर PSARA (पसारा) के अन्तर्गत पंजीकृत सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर सकते हैं।

 

2. परिधि सुरक्षा एवं भौतिक प्रवेश नियंत्रण :-

 

2.1. समस्त स्थायी एवं संविदा कर्मचारियों के लिए मानकीकृत, टैम्पर प्रूफ पहचान पत्र दृष्टिगोचर रूप से धारण करना अनिवार्य होगा।

 

2.2. कार्यालय परिसर में आम जनता के वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिषिद्ध रहेगा। वी०आई०पी० अथवा दिव्यांगजनों के वाहनों को ‘अंडर-व्हीकल मिरर’ द्वारा सघन जाँच के उपरांत ही प्रवेश अनुमन्य होगा।

 

2.3. सुरक्षा जाँच (Screening) प्रक्रियाः

 

2.3.1. प्रवेश द्वारों पर यथावश्यकता से स्थापित डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) के माध्यम से प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

 

2.3.2. महानुभावों / विशिष्ट व्यक्तियों के वाहन पूर्व अनुमति के साथ ही परिसर में प्रवेश कर सकेगें।

 

2.3.3. सुरक्षा कर्मियों द्वारा सभी व्यक्तियों की शारीरिक जाँच (Frisking) की जाए।

 

2.3.4. दुर्व्यवहार के दोषी व्यक्तियों (Black Listed) का परिसर में प्रवेश वर्जित करने हेतु सुरक्षा चौकी पर एक औपचारिक “नो-एंट्री” फोटो युक्त पंजिका संधारित की जाए।

 

3. आगंतुक प्रबंधन प्रणाली (Visitor Management System):-

 

कार्यालयों में यथासंभव डिजिटल VMS प्रणाली लागू की जाए तथा जहाँ पर सम्भव न हो, तो भौतिक रजिस्टर के माध्यम से भी आगन्तुकों का विवरण रखा जाए, :

 

3.1. आगंतुक की उच्च-रिजॉल्यूशन फोटो एवं वैध सरकारी पहचान पत्र का सत्यापन कर वी०एम०एस० में प्रविष्टि की जाए। भौतिक रजिस्टर होने की दशा में आगंतुक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र संख्या और आने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से अंकित हो। संलग्नक 1

 

आगन्तुकों हेतु सामान्य दिशा-निर्देश (Do’s and Dont’s)

 

प्रवेश एवं पहचान (Access & Identification)

 

कार्यालय में प्रवेश से पूर्व स्वागत कक्ष (Reception) पर अपना पंजीकरण कराएं और वैध पहचान पत्र (Aadhaar/Voter ID) दिखाए एवं साथ रखे।

 

किसी भी अधिकारी से मिलने के लिए पूर्व निर्धारित समय (Appointment) या आवंटित टोकन नंबर की प्रतीक्षा करें।

 

शिष्टाचार एवं व्यवहार (Standard of Behavior)

 

सरकारी अधिकारी/कर्मचारी के साथ बात करते समय शिष्ट भाषा का प्रयोग करें।

 

किसी भी प्रकार का शोर-शराबा, नारेबाजी या उत्तेजक व्यवहार कार्यालय परिसर में पूर्णतः वर्जित है।

 

अधिकारी के कक्ष में एक समय में केवल दो (2) व्यक्तियों (या अधिकृत प्रतिनिधि) को ही प्रवेश की अनुमति होगी। 02 से अधिक व्यक्ति किसी भी दशा में अधिकारियों के कक्ष में प्रवेश नहीं करेंगे।

 

शारीरिक हमला या अभद्र व्यवहारः ड्यूटी पर तैनात किसी भी लोक सेवक (Public Servant) के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या गाली-गलौज करना एक गंभीर दंडनीय अपराध है।

 

ऐसा करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी और उन्हें परिसर से तुरन्त निष्कासित कर दिया जाएगा।

 

यह परिसर पूर्णतः सी०सी०टी०वी० से आच्छादित है। आपका अमर्यादित व्यवहार आपको कानूनी रूप से दण्ड का भागीदार बना सकता है।

 

प्रतिबंधित वस्तुएं (Prohibited Items)

 

कार्यालय के भीतर ज्वलनशील पदार्थ, स्याही (Ink), लाठी-डंडा, हथियार या किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक वस्तु ले जाना पूर्णतः वर्जित है।

 

परिसर के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग करने से पूर्व सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।

 

शिकायत दर्ज करने का सही तरीका (Grievance Redressal)

 

यदि आप किसी निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं, तो अपनी बात लिखित रूप में विभागाध्यक्ष / कार्यालयाध्यक्ष के समक्ष या इस नम्बर….. ..पर सम्पर्क कर सकते है।

 

शारीरिक बल का प्रयोग आपकी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह आपको कानूनी मुश्किलों में डाल सकता है। 3.2. सत्यापन के उपरांत समय-मुद्रित (Time-stamped) क्यू०आर०/ आर०एफ०आई०डी० बैज निर्गत किया जाए, जो आगंतुक को केवल निर्दिष्ट ‘मीटिंग जोन’ तक ही सीमित रखे। डिजिटल पास की अनुपलब्धता की स्थिति में, हस्ताक्षरित पेपर-पास जारी किया जाए जिस पर प्रवेश और निकास का समय और स्थान जिसके लिए मान्य है, दर्ज हो।

 

3.3. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से भेंट हेतु पूर्व से समय लेना अनिवार्य होगा। बिना पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के उपस्थित होने वाले आगंतुकों को प्रवेश द्वार से ही वापस कर दिया जाए।

 

4. जन-सामान्य से भेंट एवं बैठक प्रोटोकॉलः-

 

4.1. विभागाध्यक्षों द्वारा जन शिकायतों की सुनवाई हेतु नियत समय निर्धारित कर प्रवेश द्वार एवं वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाए।

 

4.2. प्रतिनिधिमंडल (Delegation) सीमा: आम जनता के प्रतिनिधिमंडल में दो (02) से अधिक व्यक्ति होने पर बैठक अधिकारी के कक्ष के स्थान पर ‘कॉन्फ्रेंस रूम’ में आहूत की जाए, जिसमें अनिवार्य रूप से सी०सी०टी०वी० कैमरा लगा होना चाहिए। ‘कॉन्फ्रेंस रूम’ में एक पृथक से निकास द्वार भी होना चाहिए।

 

4.3. निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अधिकारी के कक्ष में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की अधिकतम संख्या तीन (03) (प्रतिनिधि सहित) तक सीमित रखी जाए। अतिरिक्त व्यक्तियों हेतु सुरक्षित प्रतीक्षालय की व्यवस्था की जाए।

 

4.4. वी०आई०पी० के साथ आने वाले सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों को अपने शस्त्र मुख्य रिसेप्शन पर घोषित करने होंगे तथा वे निर्दिष्ट प्रतीक्षालय में ही रुकेंगे, जब तक कि कोई विशिष्ट खतरा न हो।

 

4.5. प्रतिनिधिमंडल लाने वाले व्यक्ति, प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख तथा इसके सभी सदस्यों का नैतिक दायित्व होगा कि वे यह सुनिश्चित करें कि परिसर में सार्वजनिक मर्यादा एवं शिष्टाचार पूर्ण रूप से बनाए रखा जाए।

 

5. सुरक्षा अवसंरचना एवं निगरानी व्यवस्थाः-

 

5.1. प्रवेश द्वारों, गलियारों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के कक्षों में उच्च गुणवत्ता (HD) के सी०सी०टी०वी० कैमरे (ऑडियों रिर्काडिंग सहित) स्थापित किए जाएं। फोरेंसिक पहचान सुनिश्चित करने हेतु वीडियो फुटेज का स्थानीय सर्वर पर न्यूनतम 03 माह (90 दिन) का सुरक्षित बैकअप रखा जाए।

 

5.2. अधिकारियों की डेस्क के नीचे एवं रिसेप्शन पर गुप्त ‘साइलेंट पैनिक अलार्म’ स्थापित किए जाए।

 

6. घटना के उपरान्त विधिक एवं संस्थागत कार्यवाहीः-

 

6.1. साक्ष्यों की अखंडता (Chain of Custody) सुनिश्चित करने हेतु घटनास्थल को तत्काल सील किया जाए। सफाई कर्मचारियों को साक्ष्यों (फटे दस्तावेज, टूटे फर्नीचर) से छेड़छाड़ न करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। 6.2. सम्बंधित कार्यालय/आई०टी० प्रशासक द्वारा सी०सी०टी०वी० फुटेज की सुरक्षित प्रतिलिपि तैयार कर जाँच अधिकारी को अविलम्ब उपलब्ध कराई जाए।

 

6.3. घायल कार्मिकों की तत्काल चिकित्सा व्यवस्था कराते हुए ‘मेडिको-लीगल केस’ दर्ज कराया जाए।

 

6.4. भारतीय न्याय संहिता (BNS, 2023) व अन्य अधिनियमों की सुसंगत धाराओं का प्राथमिकी में अनिवार्य रूप से समावेश किया जाए।

 

6.5. ऐसे प्रकरणों की विवेचना अनिवार्य रूप से निरीक्षक (Inspector) स्तर के अधिकारी द्वारा ही सम्पादित की जाएगी।

 

6.6. यह सुनिश्चित किया जाए कि विवेचना दो महीने के अंतर्गत समाप्त कर ली जाए।

 

7. विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संलग्नक-1 में अंकित जानकारी कार्यालय परिसर के सभी प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित (चस्पा) की जाए :-

 

7.1. आगंतुकों के लिए निर्धारित आचार संहिता (Do’s and Dont’s)।

 

7.2. सरकारी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार या कदाचार की स्थिति में की जा सकने वाली संभावित दंडात्मक कार्रवाइयों की सूची।

 

7.3. सभी महत्वपूर्ण संपर्क विवरण।

 

8. संबंधित विभागीय सचिव के अनुरोध पर सचिव, गृह विभाग यदि उचित समझें, तो महत्वपूर्ण निदेशालयों एवं उच्च जोखिम वाले कार्यालयों का वार्षिक सुरक्षा ऑडिट (Annual Security Audit) सुनिश्चित किये जाने हेतु पुलिस मुख्यालय को निर्देशित करेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button
Translate »