धामी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: ‘धनदा’ की विदाई और ‘सुबोध’ का उदय, क्या हैं इसके सियासी मायने?

नेहा कोठियाल।
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट के विभागों में बड़ा बदलाव करते हुए डॉ. धन सिंह रावत से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मंत्रालय वापस ले लिया। अब यह विभाग कांग्रेसी पृष्ठभूमि से भाजपा में आए सुबोध उनियाल को सौंपा गया है। इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या यह महज कार्यभार का प्रबंधन है या इसके पीछे कोई गहरी ‘सियासी स्क्रिप्ट’ लिखी गई है।
■ खांटी भाजपाई बनाम कांग्रेसी गोत्र
इस फेरबदल का सबसे दिलचस्प पहलू विचारधारा का टकराव है। डॉ. धन सिंह रावत को गढ़वाल क्षेत्र का सबसे ‘विशुद्ध संघी’ और भाजपाई गोत्र का नेता माना जाता है। वहीं, सुबोध उनियाल का मूल कांग्रेसी रहा है। एक कट्टर विचारधारा वाले मंत्री से विभाग छीनकर दूसरे पाले से आए मंत्री को सौंपना, संघ और संगठन के भीतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
■ बंगाल में ‘फील्डिंग’ या उत्तराखंड में ‘फिल्डिंग आउट’?
धन सिंह रावत पिछले कुछ समय से उत्तराखंड की सक्रिय राजनीति से दूर पश्चिम बंगाल के चुनावों के लिए पार्टी की जमीन तैयार करने में व्यस्त हैं। पार्टी आलाकमान उन्हें अक्सर ‘टफ टास्क’ के लिए राज्य से बाहर भेजता रहा है।
पहला तर्क: क्या उनकी बाहरी व्यस्तता की वजह से स्वास्थ्य विभाग प्रभावित हो रहा था?
दूसरा तर्क: क्या उन्हें जानबूझकर राज्य की मुख्यधारा से दूर रखने के लिए यह समीकरण बिठाया गया है?
■ ‘धाकड़’ मुख्यमंत्री का ‘धुरंधर’ दांव
सोशल मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री धामी अब सरकार में केवल ‘धाकड़’ ही नहीं बल्कि ‘धुरंधर’ खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं। धन सिंह रावत को अक्सर सीएम पद के एक संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में उनसे अहम विभाग लेना यह संकेत देता है कि फिलहाल सत्ता की कमान पर सूबेदार साहब की पकड़ बेहद मजबूत है।
“यदि स्वास्थ्य विभाग की खराब परफॉर्मेंस इसका आधार है, तो सवाल सरकार पर भी उठते हैं कि साढ़े चार साल तक इस बदलाव के लिए इंतजार क्यों किया गया?”
निष्कर्ष: समर्थकों में मायूसी और भविष्य की सुगबुगाहट
धन सिंह रावत के समर्थक सोशल मीडिया पर इस फैसले से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनके अनुसार, धनदा ने अपने विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहतर काम किया था। अब देखना यह होगा कि सुबोध उनियाल इस ‘कांटों भरे ताज’ को कैसे संभालते हैं और धन सिंह रावत की अगली राजनीतिक चाल क्या होगी।



