पौड़ी के खांड्यूसैंण में गुलदार के हमले में चार वर्षीय बच्ची आरुषि की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बुधवार को ग्रामीणों ने पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग जाम कर तहसीलदार और वन विभाग के एसडीओ को एक दुकान में बंद कर दिया। मौके पर पहुंचे DFO के साथ भी धक्का-मुक्की हुई। ग्रामीण क्षेत्र में गुलदार के आतंक से निजात दिलाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं।
पौड़ी के खांडूसैंण में गुलदार के हमले में 7 साल की बच्ची की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने पौड़ी DFO को डण्डे दिखाकर भगाया, पुलिस प्रशासन के छूट गए पसीने! महिलाओं का गुस्सा देख डीएफओ साहब भीड़ से जान बचाकर भागे।
पौड़ी के खांड्यूसैंण में गुलदार के हमले में बच्ची की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। गुस्साए ग्रामीणों और महिलाओं ने मौके पर पहुंचे पौड़ी DFO का घेराव किया और डंडे दिखाकर उन्हें वहां से जाने पर मजबूर कर दिया। ग्रामीणों के उग्र विरोध के बीच पुलिस और प्रशासन को भी हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
देवप्रयाग पौड़ी मोटर मार्ग पर खांड्यूसैंण के पास गुलदार के हमले में चार वर्षीय मासूम बच्ची की मौत के बाद क्षेत्र में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया है। मंगलवार शाम विधायक का घेराव करने के बाद बुधवार को ग्रामीणों से मिलने पहुंचे पौड़ी तहसीलदार और वन विभाग एसडीओ को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने दोनों अधिकारी को एक दुकान में बंद कर अपना गुस्सा जाहिर किया। जबकि डीएफओ के साथ धक्का मुक्की की।
घटना के मुताबिक, 3 नवंबर मंगलवार शाम 6 बजे करीब पौड़ी के खांड्यूसैंण में गुलदार ने चार साल की आरुषि को निवाला बना दिया। घटना से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया। इस दौरान पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी शाम 7:30 बजे पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तो ग्रामीणों ने विधायक को ही घेर लिया। ग्रामीण, विधायक की गाड़ी के ऊपर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी करने लगे. पुलिस के जवान ग्रामीणों से समझाते रहे, लेकिन ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान काफी देर तक विधायक अपनी कार के अंदर ही रहे। इसके बाद रात करीब 10:15 बजे विधायक कार से बाहर आए और ग्रामीणों से वार्ता कर सुरक्षा का आश्वासन दिया। विधायक के समझाने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ, जिसके बाद विधायक का काफीले के मौके से रवाना हुआ।
वहीं, अगले दिन बुधवार 4 नवंबर को फिर सुबह 8 बजे ग्रामीण पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर धरने पर बैठ गए और सड़क जाम कर दी। सुबह 9 बजे तक मार्ग पूरी तरह बंद रहा। ग्रामीणों को समझाने पहुंचे तहसीलदार पौड़ी राजेंद्र गोस्वामी और वन विभाग के एसडीओ आयशा बिष्ट को भी ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ा. ग्रामीणों का धीरे-धीरे आक्रोश बढ़ा और सुबह करीब 11:30 बजे ग्रामीणों ने दोनों अधिकारियों को एक दुकान में बंद कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ समय से क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग और शासन-प्रशासन की ओर से कोई ऐसी ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को इस भय से निजात मिल सके। ग्रामीणों ने कहा कि, अब स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग अपने घरों के आंगन और आसपास के रास्तों पर भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। छोटे बच्चों को घर से बाहर भेजने में अभिभावक डर रहे हैं।
वहीं, तहसीलदार और एसडीओ को बंदी बनाए जाने की जानकारी मिलने पर वन विभाग डीएफओ महातिम यादव मौके पर पहुंचे, जहां डीएफओ के साथ ही ग्रामीणों की धक्का मुक्की हुई। हालांकि, डीएफओ के आश्वासन के बाद आधे घंटे तक बंदी बने तहसीलदार और एसडीओ को ग्रामीणों ने मुक्त किया। वहीं अब डीएफओ और ग्रामीणों के बीच वार्ता जारी है। हालांकि, सुबह 8 बजे से ग्रामीणों ने मोटरमार्ग जाम किया हुआ है।
मंगलवार रात को हुई घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। आज एक टीम लगातार गश्त कर रही है। साथ ही ट्रैप कैमरे और पिंजरा भी लगाया गया है। एक शूटर की टीम मौके पर है, जो गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने और अंतिम विकल्प के रूप में नष्ट करने के आदेश प्राप्त हो गए हैं।
-महातिम यादव, डीएफओ पौड़ी



