देहरादून। डॉ. अंकित जोशी, पूर्व अध्यक्ष, एससीईआरटी शाखा राजकीय शिक्षक संघ ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा विभाग राज्य का सबसे बड़ा विभाग है, जहाँ हजारों शिक्षक एवं कर्मचारी पर्वतीय, दुर्गम तथा सुगम क्षेत्रों में निरंतर सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। ऐसे विशाल विभाग में स्थानांतरण व्यवस्था केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कार्मिकों के मनोबल, कार्यक्षमता तथा पारिवारिक एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
उन्होंने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत एवं नियमबद्ध बनाने के उद्देश्य से वर्षों तक कार्मिक संगठनों एवं शिक्षकों द्वारा स्थानांतरण अधिनियम की मांग की गई थी। शासन द्वारा अधिनियम लागू किए जाने के बाद यह अपेक्षा थी कि स्थानांतरण निर्धारित समयसीमा एवं अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप नियमित रूप से संपादित होंगे। किंतु विगत वर्षों में विभिन्न कारणों से स्थानांतरण प्रक्रिया अपेक्षित रूप से संचालित नहीं हो सकी है। विशेष रूप से पिछले दो वर्षों से सामान्य स्थानांतरण प्रभावित रहने के कारण अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
डॉ. जोशी ने कहा कि राज्य के अनेक शिक्षक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, पारिवारिक दायित्वों, वृद्ध माता-पिता की देखभाल, दिव्यांग आश्रितों की जिम्मेदारी तथा अन्य विषम परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे कार्मिकों के लिए स्थानांतरण कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य आवश्यकता है। लंबे समय तक स्थानांतरण के अवसर उपलब्ध न होने से उनके मानसिक संतुलन, कार्य उत्साह एवं पेशेवर दक्षता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया के अतिरिक्त स्थानांतरण अधिनियम की धारा-27 के अंतर्गत विशेष परिस्थितियों में अनुमन्य स्थानांतरण भी पिछले सत्र से प्रभावी रूप से संपादित नहीं हो सके हैं। जबकि यह प्रावधान विशेष रूप से उन कार्मिकों को राहत प्रदान करने के लिए बनाया गया है जो असाधारण एवं मानवीय परिस्थितियों का सामना कर रहे हों। ऐसे मामलों के लंबित रहने से संबंधित शिक्षकों की कठिनाइयाँ और अधिक बढ़ जाती हैं।
डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि शासन एवं विभाग को न्यायालयों के निर्देशों, विधिक प्रावधानों तथा प्रशासनिक आवश्यकताओं का पूर्ण सम्मान करते हुए स्थानांतरण संबंधी निर्णय लेने चाहिए। साथ ही यह भी आवश्यक है कि स्थानांतरण व्यवस्था को अनावश्यक रूप से प्रभावित करने वाले व्यावहारिक अवरोधों का समयबद्ध समाधान खोजा जाए, ताकि अधिनियम की भावना के अनुरूप कार्मिकों को राहत मिल सके।
उन्होंने विभाग एवं शासन से आग्रह किया कि स्थानांतरण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर सामान्य स्थानांतरणों एवं धारा-27 के अंतर्गत लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इससे न केवल शिक्षकों एवं कर्मचारियों का मनोबल सुदृढ़ होगा, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली में सकारात्मकता, स्थिरता एवं कार्यकुशलता का वातावरण भी निर्मित होगा।

