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आग में धू -धू कर जल रहे हैं प्रदेश के जंगल, प्रमुख वन संरक्षक चले विदेश यात्रा!

    1. शासन तय करता है छुट्टी पर जाने पर किसके पास हो चार्ज 
  • खुद ही तय कर दिया किसको चार्ज देकर जाएंगे विदेश यात्रा 
  • शासन तक को सूचित नहीं किया कि एचओडी हैं विदेश यात्रा पर 

राजेन्द्र जोशी 

देहरादून : उत्तराखंड के बारे में देशभर में एक कहावत चर्चित है कि यहां की अफसरशाही सरकारों के काबू में नहीं रहती यह बात ऐसे ही यहां के लिए कहावत नहीं बनी यह सूबे की नौकरशाही के कृत्यों से जगजाहिर भी होती रही है। एक और कहावत है ”रोम जल रहा था नीरो बंशी बजा रहा था” यह कहावत भी उत्तराखंड के वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक पर सटीक बैठती है, जहां के मुखिया 14 मई यानी आज से 26 मई तक सरकारी विदेश यात्रा पर जा रहे हैं। इस तरह के अधिकारियों जो विभाग के सर्वे सर्वा होते हैं, के विदेश यात्रा पर जाने और उनकी जगह कौन उनका कार्य देखेगा उसके नियम और कायदे का विवरण अधिकारियों के कार्य नियमावली में पहले से तय हैं। लेकिन यहां प्रमुख सचिव वन ने भी आँख बंद कर विदेश यात्रा की स्वीकृति तो दे दी लेकिन यह नहीं देखा कि उत्तराखंड के जंगल वर्तमान में आग से जल रहे हैं ऐसे में कौन इनकी देखभाल करेगा?

उधर, वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि तीन अफसरों के दौरे की अनुमति से संबंधित फाइल उनके समक्ष आई थी, मगर इस दौरे के लिए हॉफ का नाम कैसे शामिल हुआ, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जूलॉजिकल सोसायटी आफ लंदन की ओर से लंदन में 14 मई से टाइगर रिकवरी प्रोग्राम रखा गया है। इसके अलावा 23 व 24 मई को पोलैंड में इंटरनेशनल जू डिजाइन से संबंधित कान्फ्रेंस है। उत्तराखंड वन विभाग को इनमें शामिल होने का न्योता मिला है। विभाग ने इन कार्यक्रमों के लिए विभाग के मुखिया जय राज के अलावा आइएफएस विवेक पांडे, पराग मधुकर धकाते, नीतिशमणि त्रिपाठी के नाम तय किए। चारों के विदेश दौरे के लिए केंद्र और राज्य से अनुमति मिल चुकी है।

नियमावली के अनुसार ऐसे अधिकारी जो अपने मुख्यालय को छोड़कर अन्यत्र यात्रा या छुट्टी पर जा रहे होते हैं उनको राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है और वह  ले भी ली गयी लेकिन शासन ने यह नहीं  बताया कि उनके कार्यालय में अनुपस्थिति के दौरान उनके कार्यों का निर्वहन कौन अधिकारी करेगा इसके लिए प्रदेश शासन ही नाम तय करता है। लेकिन यहाँ तो प्रमुख वन संरक्षक जय राज ने खुद ही रंजना काला का नाम तय कर उनको अपना कार्यभार सौंप डाला है। (देखें उनके पत्र की प्रति) इतना ही नहीं उन्होंने खुद बनाये गये आदेश में कहीं भी प्रदेश सरकार को इस बावत सूचित भी नहीं किया कि वे सरकारी यात्रा पर विदेश जा रहे हैं और उनकी अनुपस्थिति में रंजना काला उनका कार्यभार देखेंगी। (देखें उनके पत्र की प्रति)

यह बात तो रही विदेश यात्रा पर जाने की इससे महत्वपूर्ण बात एक और है प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड के वन महकमे के सर्वे सर्वा अधिकारी भी हैं और वर्तमान में उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों के जंगल आग की चपेट में हैं और जिस विभाग पर जंगलों का जिम्मा है उसी विभाग के आला अधिकारी विदेश यात्रा पर निकल गए हैं । इससे यह साफ़ है कि ऐसे अधिकारियों को सूबे के जंगलों से कोई लेना -देना नहीं उन्हें विदेश यात्राओं का लुत्फ़ लेना सूबे के जंगलों के आग से जलते रहने से ज्यादा जरूरी है। इससे साफ़ होता है कि ऐसे अधिकरियों को उत्तराखंड के जंगलों की कितनी चिंता है और ऐसे अधिकारी कितने समर्पित भाव से राज्य की सेवा कर रहे हैं।

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