नैनीताल: 20 साल पहले खत्म हो चुकी क्षमता, पर्यटकों का भार दोगुना; विशेषज्ञ बताते हैं एक मास्टर प्लान की दरकार
नैनीताल पर पर्यटन का बढ़ता दबाव, 19 साल में दोगुने हुए सैलानी
सरोवर नगरी नैनीताल का दायरा तो बढ़ा नहीं, लेकिन उस पर पड़ने वाला दबाव लगातार बढ़ता गया। करीब 20 साल में पर्यटननगरी पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या 5.18 लाख से बढ़कर 10.24 लाख हो गई। बढ़ते पर्यटक, वाहन और निर्माण के कारण पहाड़ दरकने लगे हैं। 2018 में लोअर माल रोड का हिस्सा धंसकर झील में मिल गया। वहीं 15 दिन न पहले अपर माल रोड में दरारें देखी गईं। भीड़ के दबाव में इस पर्यटनस्थल पर बढ़ते खतरे को बताती आदर्श सिंह की रिपोर्ट।
नैनीताल नगर पालिका का क्षेत्रफल करीब 11.73 वर्ग किमी है। उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 5.18 लाख थी जो वर्ष 2024 में बढ़कर 10.24 लाख हो गई। यानी 19 साल में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई।
इसके विपरीत शहर की स्थायी आबादी में वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही। 2011 में हुई जनगणना में यहां की आबादी 41,377 थी जबकि वर्तमान में नगर पालिका के अनुसार यह करीब 55 हजार आंकी गई है। इससे साफ है कि शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं पर स्थायी आबादी से कहीं अधिक पर्यटन का दबाव पड़ रहा है।
लगातार हो रहा भूस्खलन
शहर का भार बढ़ने से जमीन पर दबाव पड़ रहा है जिसका असर आसपास हो रहे भूस्खलन के रूप में दिखाई दे रहा है। नैनीताल में 18 अगस्त 2018 को लोअर मॉलरोड का हिस्सा धंसकर नैनी झील में समा गया था। फरवरी 2023 और सितंबर 2025 में भी सड़क पर दरारें आने और धंसाव होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रही हैं।
सिर्फ 4,000 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था
शहर में करीब 5,563 आवासीय, 642 व्यावसायिक और 284 सरकारी भवन हैं। करीब 300 होटल और 200 होम स्टे पर्यटन ढांचे का हिस्सा हैं लेकिन शहर में 4,000 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था सीमित है। यह आंकड़ा नैनीताल के पर्यटन मॉडल की सबसे बड़ी कमजोरी सामने लाता है। सीजन में जब पर्यटक वाहन शहर की ओर उमड़ते हैं तो पार्किंग कम पड़ जाती है।
पर्यटन सीजन में निकलता है 6.6 टन अतिरिक्त कचरा
पर्यटन दबाव को समझने के लिए कचरे के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड प्रशासन अकादमी की रिपोर्ट के अनुसार ऑफ-सीजन में नैनीताल में करीब 24.4 मीट्रिक टन ठोस कचरा प्रतिदिन निकलता है। सीजन में यह बढ़कर करीब 31 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो जाता है। यानी पर्यटन सीजन में रोजाना करीब 6.6 मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरा संभालना पड़ता है। पुराने नगर विकास योजना दस्तावेज में कचरे की मात्रा पीक और नॉन-पीक अवधि में करीब 12 से 18 टन प्रतिदिन बताई गई थी
2006 के बाद ज्यादा बिगड़ी िस्थित : विशेषज्ञ
विश्व पर्यावरण संगठन के पूर्व अध्यक्ष अजय रावत ने बताया कि शहर की केयरिंग कैपेसिटी 2006 में समाप्त हो चुकी है। नैनीताल की लाइफलाइन नैनी झील में एरिएशन और बायोमैनोप्यूलेशन लगाया गया लेकिन इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसे में झील का अस्तित्व खतरे में है।
वाहनों व तीर्थयात्रियों की गतिविधियों से पहाड़ पर अतिरिक्त बोझ होना सामान्य बात है। इन सबके बीच जरूरी है कि पूरे नैनीताल क्षेत्र का एक मास्टर प्लान तैयार किया जाए जो यह बता सके कि कौन सा क्षेत्र असुरक्षित।



