UTTARAKHAND

डॉ० अंकित जोशी ने दिया निदेशक माध्यमिक शिक्षा को मांगपत्र

राजकीय शिक्षक संघ के एससीईआरटी शाखा के अध्यक्ष डॉ० अंकित जोशी ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देते हुए प्रदेश में शैक्षिक उन्नयन के दृष्टिगत कुछ सुझाव व शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण की मांग की है – – स्थानांतरण की संपूर्ण प्रक्रिया नियमानुसार एवं पारदर्शी होनी चाहिए इसके दृष्टिगत स्थानांतरण प्रक्रिया में काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापना की जाए ।

  • स्थानांतरण नियमावली 2017 के नियम 4 व 5 के अनुपालन में कार्यस्थल का वर्गीकरण व उसका प्रकटीकरण किया जाना ।
  •  स्थानांतरण अधिनियम 2017 के नियम 23 का कठोरता से अनुपालन किया जाए ।
  • नियमावली के परिशिष्ट-1 के अनुसार प्रत्येक वर्ष कार्यस्थल का मानकानुसार चिन्हीकरण जिला अधिकारी की अध्यक्षता मे गठित समिति द्वारा किया जाना है जिसका अनुपालन अभी तक नहीं हो सका है ।
  • स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश के शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी संस्थाध्यक्षों से एजुकेशन पोर्टल पर समस्त कर्मियों का त्रुटिहीन विवरण की प्रविष्टि व सुगम-दुर्गम का नियमानुसार निर्धारण संबंधी एफिडेविट लिया जाना चाहिए ।
  • विगत वर्ष एससीईआरटी एवं डायट से अनिवार्य स्थानांतरण के सुगम से दुर्गम श्रेणी के अंतर्गत कतिपय शिक्षकों के स्थानांतरण अन्यत्र डायटों में किए गए थे किंतु आज तक उन डायटों को दुर्गम श्रेणी में नहीं दर्शाया गया है ।
  • कतिपय ऐसे विद्यालय हैं जो एजुकेशन पोर्टल पर तो दुर्गम श्रेणी के दर्शाये जा रहे हैं किंतु रिक्ति की सूची में सुगम दर्शाए गए हैं ।
  • विभागीय बेबसाइट मे नियमानुसार कार्यस्थल के सुगम-दुर्गम होने का इस शैक्षिक सत्र में चिन्हीकरण कर नवीनतम सटीक सूची प्रदर्शित नहीं है ।
  • दुर्गम से सुगम स्थल में अनिवार्य स्थानांतरण की पात्रता सूची में होने के बावजूद ऐच्छिक विकल्प देते हुए यह छूट देना कि यदि आप चाहें तो दुर्गम में ही बने रह सकते हैं , स्थानांतरण अधिनियम के विरुद्ध है । ऐसे में सरल एवं सहज दुर्गम के विद्यालय कभी भी रिक्त नहीं हो सकेंगे ।
  • ऐसे सभी शिक्षकों के आँकड़ों को एजुकेशन पोर्टल पर दुरुस्त किया जाना चाहिए जिनकी पूर्व स्थानांतरण नीति के अनुसार किसी विद्यालय की एक वर्ष की किसी दुर्गम स्थल की सेवा की गणना दो वर्ष की जानी थी, ऐसे सभी शिक्षकों को पिछली स्थानांतरण नीति के इस प्रावधान का लाभ दुर्गम की सेवा की गणना में प्रदान की जानी चाहिए ।
  • सुगम से दुर्गम एवं दुर्गम से सुगम अनिवार्य स्थानांतरण के फलस्वरूप प्रत्याशा में फलित रिक्तियों के विकल्प भरने के उद्देश्य से ऐसे स्थलों को नियमानुसार रिक्त दर्शाया जाना चाहिए जो कि अभी तक नहीं हो सका है ।
  • एससीईआरटी और डायटों के रिक्त पदों को स्थानांतरण अधिनियम के अंतर्गत शिक्षकों की प्रस्थापना हेतु रिक्त दर्शाया जाना चाहिए ।
  • अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के शिक्षकों को जून माह के अवकाश में पठन-पाठन करवाने पर उपार्जित अवकाश देय होना चाहिए । 
  • अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत ऐसे शिक्षक, जो इन विद्यालयों में रहने के इच्छुक नहीं हैं, जिन्होंने यहां की चयन प्रक्रिया में प्रतिभाग नहीं किया व यदि वे दुर्गम से सुगम की पात्रता सूची में हैं तो नियमानुसार उनका स्थानांतरण सुगम स्थलों में किया जाए ।
  • वरिष्ठता का निर्धारण कर तत्काल एलटी से प्रवक्ता एवं हेडमास्टर (प्रधानाध्यापक) तथा प्रधानाचार्य के पदों पर पदोन्नति की जाए ।
  • अंतरमंडलीय शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु तत्काल समाधान कर शत-प्रतिशत अन्तरमण्डलीय एलटी शिक्षकों का स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।
  • अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के भावी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम अच्छे रहें इसके लिए अभी से ठोस, व्यावहारिक एवं प्रभावी नीति का निर्माण कर लागू करने पर बल दिया जाना चाहिए ।
  • मुफ्त पाठ्यपुस्तकों को शीघ्रातिशीघ्र बच्चों को उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ।
  • नवीनतम मासिक पाठ्यक्रम विभाजन समस्त विद्यालयों को तत्काल उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ।
  • समग्र शिक्षा के जनपद कार्यालयों तथा अटल उत्कृष्ट विद्यालयों का सुगम-दुर्गम का निर्धारण स्थानांतरण अधिनियम 2017 के अन्तर्गत स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किया जाए।
    उनके द्वारा इस संबंध में मीडिया में बयान जारी करने से इंकार किया गया है और बताया गया है कि उनके द्वारा विभाग के समक्ष शिक्षकों की समस्याएं रख दी गई हैं और उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही विभाग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और इन सभी समस्याओं का समाधान करेगा ।

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