देहरादून : कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों ….. यह कहावत ऐसे ही नहीं बनी। इस कहावत को चरितार्थ करने के लिए हौसलों की ऊँची उड़ान और कुछ अलग सा कर गुजरने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए और इसी इच्छा शक्ति मजबूत इरादों के दम पर पहाड़ के जनजातीय इलाके की एक महिला ने वह सब कुछ कर दिखाया है जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों को होती है। पहाड़ की इस जीवट महिला का नाम है हेमलता डोभाल। वैसे तो हेमलता डोभाल से अपने गांव को ”नए भारत” से जोड़ने के लिए वह सब किया जो किसी ने आज तक सोचा ही नहीं। उनकी उपलब्धियों पर उन्हें अब 23 अक्टूबर को दिल्ली आने का न्योता मिला है, जहां उन्हें ”दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण” सम्मान दिया जाने वाला है।
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