2015 में कांग्रेस सरकार ने विधान सभा में राज्य आंदोलनकारियों को 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक पास किया और इस विधेयक को राज्यपाल के हस्ताक्षरों के लिये भेजा परन्तु राजभवन से यह विधेयक वापस नहीं आया । अभी तक आयोग की परिधि से बाहर 730 लोगो को नौकरी दी गयी है। जो अब इस निर्णय के बाद खतरे में आ गई है।