भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी मौखिक टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण जारी किया।
लाइव लॉ और बार एंड बेंच के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को ग़लत तरीके से पेश किया और ऐसा दिखाया मानो उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की हो।
अपनी टिप्पणी पर सोशल मीडिया में विवाद खड़ा होने के बाद जारी बयान में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उनकी टिप्पणियां केवल उन लोगों के ख़िलाफ थीं, जिन्होंने फर्ज़ी या नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश किया है, न कि सामान्य रूप से युवाओं के ख़िलाफ़।
उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है। ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं।”

