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5 साल में 826 प्राथमिक स्कूल बंद: पलायन और घटती छात्र संख्या ने शिक्षा व्यवस्था पर लगाया ताला

देहरादून।

 उत्तराखंड में बजट सत्र के दौरान कई ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जो बेहद चौंकाने वाली हैं. पहले कैग की रिपोर्ट में कई खुलासे हुये. अब बजट सत्र के दौरान विभागीय जवाब भी हैरान करने वाले हैं. ऐसी ही जानकारी शिक्षा विभाग से निकलकर सामने आई है. उत्तराखंड में पांच साल में 826 प्राथमिक स्कूल बंद हुये हैं. बताया जा रहा है कि पलायन और घटती छात्र संख्या के कारण इन स्कूलों को बंद करना पड़ा. इसकी जानकारी सरकार ने विधानसभा में दी. प्रस्तुत आंकड़े वर्ष 2020 से 2025 तक के हैं.

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के हालात किसी से छुपे नहीं हैं. अब विधानसभा के माध्यम से इसे लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. बताया गया है कि राज्य में पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान 826 प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लग चुके हैं. ये जानकारी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने एक सवाल के बाद विधानसभा में दी है.

यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि पहाड़ों में बदलते सामाजिक और आर्थिक हालात की भी एक स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही है. कभी जिन गांवों के स्कूल बच्चों की चहल पहल से गुलजार रहते थे आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है. कई स्कूलों में छात्रों की संख्या इतनी कम रह गई कि उन्हें चलाना मुश्किल हो गया है. यही कारण है कि शिक्षा विभाग को इन स्कूलों को बंद करने या नजदीकी विद्यालयों में समायोजित करने का फैसला लेना पड़ा. यह स्थिति राज्य की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पहाड़ों के भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

विधानसभा में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य: विधानसभा में इस विषय को बीजेपी के ही विधायक महेश जीना ने उठाया तो सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया. सरकार ने स्वीकार किया कि छात्र संनैनीताल में 49, ख्या बेहद कम होने के कारण कई विद्यालयों को बंद करना पड़ा.

शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 826 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें पूरी तरह बंद कर दिया गया है, क्योंकि वहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बेहद कम रह गई थी. इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 808 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. सरकार का कहना है कि जिन स्कूलों में बहुत कम छात्र रह गए थे वहां बच्चों को पास के बड़े स्कूलों में भेजा गया है, जिससे उन्हें बेहतर शिक्षण माहौल और संसाधन मिल सकें.

जिलेवार आंकड़े बताते हैं कहां सबसे ज्यादा असर: स्कूल बंद होने की समस्या का असर पूरे राज्य में एक जैसा नहीं है. कुछ जिलों में यह स्थिति ज्यादा गंभीर दिखाई दे रही है. विधानसभा में रखें गए आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक टिहरी जिले में स्कूल बंद हुए हैं. यहां 262 स्कूलों को बंद किया गया है. उसके बाद नंबर आता है पौड़ी गढ़वाल जिले का. यहां 120 स्कूल बंद किए गए हैं. तीसरे नंबर पर पिथौरागढ़ जिला है, जहां 104 स्कूल बंद हुए हैं.

स्कूल बंद मामलों में टॉप तीन जिले-
वहीं, अन्य जिलों में अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43, देहरादून में 38, चंपावत जिले में 34, उत्तरकाशी में 25, उधमसिंह नगर में 21, रुद्रप्रयाग में 15 जबकि बागेश्वर में भी 25 स्कूल बंद हुए हैं. हरिद्वार में 2 स्कूलों पर ताले लगे हैं.

इन आंकड़ों से साफ है कि पहाड़ी जिलों में स्कूलों के बंद होने की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. इसका मुख्य कारण इन इलाकों से लगातार हो रहा पलायन और घटती आबादी है. अभी राज्य में कुल 10,940 प्राथमिक स्कूल चल रहे हैं.

पलायन का शिक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन लंबे समय से एक बड़ी सामाजिक समस्या रहा है. इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है. रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक जीवन की तलाश में हजारों परिवार हर साल गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं. जब परिवार गांव छोड़ देते हैं तो स्वाभाविक रूप से बच्चों की संख्या भी कम हो जाती है. यही कारण है कि कई गांवों में स्कूल तो बने हुए हैं, लेकिन, उनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम रह गई है.

कई जगहों पर ऐसी स्थिति भी सामने आई है जहां एक स्कूल में केवल दो या तीन छात्र ही बचे थे. ऐसे हालात में पूरे स्कूल को संचालित करना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया है. जिसके चलते उन्हें बंद करने का फैसला लिया गया है.

हजारों स्कूलों में बेहद कम छात्र: राज्य में बंद हुए स्कूलों के अलावा बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय भी हैं जहां छात्र संख्या बेहद कम है. कई स्कूलों में दस से भी कम छात्र पढ़ रहे हैं. शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि कम छात्रों को इधर से उधर स्कूल में भेजा जा रहा है.

बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बड़ा कारण: शिक्षावद् शिव शंकर जायसवाल कहते हैं स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी छात्रों की संख्या घटने का एक महत्वपूर्ण कारण है. कई विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में हैं. वहां पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं. कुछ स्कूलों में शौचालय, पेयजल और खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे हालात में अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से हिचकते हैं.

अभिभावक निजी स्कूलों को बेहतर विकल्प मानते हैं. यही वजह है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन लगातार घटता जा रहा है. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी लंबे समय से एक बड़ी समस्या है.

शिव शंकर जायसवाल –

पहाड़ों की शिक्षा बचाने की बड़ी चुनौती: उत्तराखंड में पांच वर्षों के भीतर 826 प्राथमिक स्कूलों का बंद होना एक गंभीर संकेत है. यह स्थिति बताती है कि पहाड़ों में शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है. पलायन, घटती छात्र संख्या, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की समस्या जैसे कई कारण मिलकर इस संकट को और गहरा बना रहे हैं. अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है.

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