यमुनोत्री धाम से उठी चेतावनी: आस्था के नाम पर यमुना के उद्गम को न करें प्रदूषित
उत्तरकाशी।
विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम से एक चिंताजनक लेकिन महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है। धाम के स्थानीय पुरोहितों ने श्रद्धालुओं से भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि वे पवित्र धाम में आकर प्रदूषण फैलाने वाले हैं, तो यहाँ न आएं।
पुरोहितों का कहना है कि यमुना नदी, जिसे करोड़ों लोग मां का दर्जा देते हैं, उसके उद्गम स्थल पर ही आस्था के नाम पर ऐसे कार्य किए जा रहे हैं जो नदी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। श्रद्धालुओं द्वारा सिंथेटिक कपड़े, प्लास्टिक, रासायनिक रंगों और अन्य पूजा सामग्री को नदी में प्रवाहित किया जा रहा है, जिससे यमुना के स्वच्छ जल स्रोत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय पुरोहितों ने स्पष्ट कहा कि सनातन धर्म के वेद, पुराण और प्राचीन ग्रंथ कभी भी प्रकृति को नुकसान पहुंचाने की शिक्षा नहीं देते। वास्तविक श्रद्धा और भक्ति प्रकृति के संरक्षण में निहित है, न कि उसे प्रदूषित करने में।
उन्होंने कहा कि यदि यमुना को वास्तव में मां माना जाता है, तो उसकी स्वच्छता और संरक्षण को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यमुनोत्री धाम से उठी यह अपील केवल श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास और गलत परंपराओं के नाम पर प्रकृति का दोहन बंद किया जाए।
पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी यमुना के निर्मल स्वरूप के दर्शन कर सकें।



