UTTARAKHAND

अतिथि देवो भव: की परंपरा का आज भी वाहक है भारत

जब फ्रांस से सैर पर निकला एक पूरा परिवार भारत में फंसा

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून : ”चन्दन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा – बच्चा राम है” यह गीत ऐसे ही नहीं बना होगा कवि ने भारत की इस परंपरा को आत्मसात करते हुए इस पंक्तियों को लिखा होगा, लेकिन आज जहां दुनिया 21 वीं सदी की तरफ बढ़ रही है,वहीं दुनिया कोरोना वायरस की मार से बेहाल भी है हर कोई देश इसका उपचार खोजने में जुटा हुआ है लेकिन यह वायरस पल-पल अपने रंग बदल रहा है, इसी भयावह स्थिति से पूरी दुनिया लॉक डाउन में है लोग अपने -अपने घरों में कैद हो गये हैं,लेकिन कोरोना संक्रमण से पहले जो लोग देश दुनिया की सैर पर निकले थे, वे आज जहां के तहां फंसे पड़े हैं। ऐसे में भारत के उत्तरप्रदेश के महाराजगंज जिले के लक्ष्मीपुर विकास खंड अंतर्गत पड़ने वाले कोल्हुआ गांव में फ्रांस से सैर पर निकला एक पूरा परिवार फंसा हुआ है, जो एक वैनिटी वैन में बैठकर फ्रांस से सड़क मार्ग से पाकिस्तान को पार करते हुए बाघा बॉर्डर होते हुए भारत आया था, इस परिवार को नेपाल से होते हुए चीन और फिर चीन के बाद इंडोनेशिया इत्यादि देशों का सफर करते हुए वापस फ्रांस जाना था।
लेकिन जैसे ही यह परिवार गोरखपुर से सुनौली के तरफ गए तब सुनौली से 60 किलोमीटर पहले ही लॉक डाउन की घोषणा हो गई और देश की सीमाओं को कोरोना संक्रमण के चलते बंद कर दिया गया। तबसे यह परिवार कोल्हुआ गांव में एक शिव मंदिर में रुका हुआ है।
हालांकि जिला प्रशासन से लेकर फ्रांस दूतावास तक ने इन्हें आलीशान होटल में ठहराने की पेशकश की लेकिन यह लोग गांव में अब इतना खुश है कि यह लोग उस गांव को और उस मंदिर को लॉक डाउन ख़त्म होने तक छोड़ना ही नहीं चाहते। गांव वाले भी ”अतिथि देवो भव:” की सनातन परंपरा का पालन करते हुए इस परिवार की बहुत अच्छे से देखभाल करते हैं मंदिर के पुजारी हर रोज इस परिवार के लिए खाना बनाते हैं और यह परिवार भी गांव में रहकर भारत के खासकर उत्तर भारत के ग्रामीण परंपरा का अनुभव कर रहा है।

वीडियो साभार : बीबीसी हिंदी 

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