CHAMOLI
इस पवित्र नगर जोशीमठ के नैगर्सिक सौंदर्य को बचाने के लिए है कोई कार्ययोजना ?


जोशीमठ : योषि या ज्योतिष्मठ या ज्योतिर्मठ यानि जोशीमठ को हाशिये में कर मारवाड़ी बाईपास का मामले को लेकर स्थानीय लोग 75 दिनों से आन्दोलन पर हैं। इस तरह से समझें कि एक बहुत रमणीक और ऐतिहासिक और आध्यत्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जोशीमठ नगर यानी कार्तिकेयपुरम ताम्र पत्रों में वर्णित योषि जहां देश के चार शंकराचार्य पीठों में से एक ज्योतिष पीठ ( ज्योतिर्मठ) है।
लेकिन औली, सौली -डूंगरी, कल्पवृक्ष, शंकराचार्य वट वृक्ष, चित्रकांठा, तपोवन हॉट स्प्रिंग, नंदादेवी बायो स्फीयर, ऋंगी वैली, चेनाप घाटी, हाथी पर्वत, स्लीपिंग लेडी पर्वत, उत्तराखंड में नरसिंह भगवान के मूल मंदिर , उर्गम वैली,विष्णु गंगा वैली, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, श्री बद्रीनाथ जैसे और न जाने कितने दुर्लभ और अछूते महत्वपूर्ण स्थलों का बेस कैम्प जोशीमठ यानी योशिमठ को बायपास करके जाना निश्चित ही जनभावनाओं की उपेक्षा तो है ही साथ ही देश के चारधामों और चार मठों की कल्पना को न समझने की सच्चाई है।
इस महत्वपूर्ण शहर को और अधिक आकर्षक बनाने की आवश्यकता है न कि भागमभाग के फार्मूले के चलते बायपास कर एक भरे पूरे शहर के अस्तित्व को खतरे में डालने की। आखिर एक ठेठ हिमालय के अंदर के सीमांत शहर को रौनक विहीन करने के प्रयास से पलायन रोकने का कौन सा फार्मूला सफल होगा? होना तो यह चाहिए था कि आदि शंकर और कार्तिकेयपुरम साम्राज्य के प्रारंभिक दिनों से ही बद्रीनाथ की परंपरा से जुड़े सती लोगों की मूल बसावट डाडौं (देव ढोउंण्ढ)से ही विस्तृत हुए अत्यधिक रमणीक और उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास को संजोए इस पवित्र नगर के नैगर्सिक सौंदर्य को बचाने के लिए ही कोई कार्ययोजना बनती ।
लेकिन कोई उत्तराखंड को गहराई से तो समझे। ब्रिटिश और ज्यादा से ज्यादा मध्यकालीन ढर्रे के टेहरी रियासत के इतिहासबोध तक सीमित कर्ता धर्ताओं से अपेक्षा भी क्या करें। जिन्हें यह सोचने भी अवसर नहीं कि सारे हिमालय में क्या सारे भारत में उत्तराखंड को क्या सम्मान है और किनके त्याग, प्रतिभा और पराक्रमों के कारण है? दिल्ली से लोग हिमाचल और जे एंड के के दूरस्थ क्षेत्रों में अच्छी सुविधाओं के चलते जाते हैं, लेकिन जोशीमठ( योशिमठ) से आगे अलौकिक विष्णु गंगा वैली जिसमें विश्व धरोहर नंदा देवी जैवमंडल है, को अपेक्षानुसार विकसित ही नहीं किया गया है। Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur.