घर से दूर, देहरादून में मणिपुरी छात्रों ने चलाया सफाई अभियान: “सकारात्मक बदलाव लाना हमारी जिम्मेदारी”
देहरादून में पढ़ाई कर रहे मणिपुर के कुछ छात्रों ने जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना का शानदार उदाहरण पेश करते हुए हाल ही में एक सामुदायिक सफाई अभियान आयोजित किया। इस पहल के माध्यम से उन्होंने सकारात्मक बदलाव का एक मजबूत संदेश दिया।
छात्रों ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में उत्तर-पूर्व के लोगों को अक्सर असंवेदनशील टिप्पणियों और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन गुस्से या टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय उन्होंने एक अलग रास्ता चुना—ऐसा रास्ता जो शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से संदेश देता है।
यह पहल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन–देहरादून (MSU-D) के सदस्यों के नेतृत्व में 8 मार्च को अपर सुधोवाला (भाऊवाला रोड) में आयोजित की गई। करीब 20 छात्र इस अभियान में शामिल हुए और उन्होंने सड़कों तथा आसपास के क्षेत्रों में फैले कचरे को साफ कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
छात्रों ने मिलकर प्लास्टिक कचरा, बोतलें और अन्य प्रकार का कूड़ा इकट्ठा किया और क्षेत्र को साफ करने में योगदान दिया।
अभियान की प्रेरणा
इस अभियान का विचार एक ऐसे छात्र से आया जो मणिपुर में “फॉर बेटर कांग्लैपाक” नामक पर्यावरण समूह चलाते हैं। यह समूह मणिपुर में नियमित रूप से सफाई अभियान चलाता है।
देहरादून पढ़ाई के लिए आने के बाद भी उन्होंने अपने इस मिशन को जारी रखने का फैसला किया।
चेंगलाई लकपा ने कहा,
“देहरादून में एक छात्र के रूप में स्वच्छ वातावरण के लिए काम करना हमेशा मेरा उद्देश्य रहा है। चूंकि मैं मणिपुर में सफाई अभियान जारी नहीं रख पा रहा था, इसलिए मैंने सोचा कि इसी मिशन को देहरादून में MSU-D के सदस्यों के सहयोग से आगे बढ़ाया जाए। हम मिलकर स्वच्छता को बढ़ावा देना चाहते हैं और समाज के सामने एक उदाहरण पेश करना चाहते हैं।”
योजना और क्रियान्वयन
लकपा ने इस अभियान के लिए एक पोस्टर बनाकर छात्र संघ के ग्रुप में साझा किया और स्वयंसेवकों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
अभियान के दिन छात्र दस्ताने और बैग लेकर मौके पर पहुंचे और सड़क किनारे पड़े प्लास्टिक कचरे, बोतलों और अन्य गंदगी को इकट्ठा किया।
आयोजकों के लिए यह पहल सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं थी।
लकपा ने कहा,
“हमारा संदेश साफ वातावरण को बढ़ावा देना और अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हम हमेशा अपने समुदाय के साथ खड़े रहे हैं और चाहते हैं कि हमारे राज्य से बाहर पढ़ने वाला हर छात्र सुरक्षित महसूस करे और उसे अच्छा अनुभव मिले।”
उत्तर-पूर्व की संस्कृति से मिली प्रेरणा
जब उनसे पूछा गया कि उत्तर-पूर्व के मूल्यों का इस तरह की पहल पर क्या प्रभाव है, तो लकपा ने बताया कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भावना वहां की संस्कृति में गहराई से जुड़ी है।
उन्होंने कहा,
“जब भी आप कोई सकारात्मक काम शुरू करते हैं, तो बच्चे, छात्र और कामकाजी लोग भी साथ आने लगते हैं। भले ही कुछ लोग शारीरिक रूप से मदद न कर सकें, लेकिन वे आर्थिक या भावनात्मक सहयोग जरूर देते हैं।”
चुनौतियां और आगे की योजना
अभियान के दौरान कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। कचरा इकट्ठा करने के बाद उसे निपटाने की व्यवस्था करना छात्रों के लिए मुश्किल साबित हुआ, क्योंकि वे स्थानीय व्यवस्था से परिचित नहीं थे।
लकपा ने बताया,
“देहरादून में यह हमारा पहला सफाई अभियान था, इसलिए हमें प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। इसमें काफी समय लगा और कचरा ढोने के लिए हमें ज्यादा पैसा भी देना पड़ा।”
हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही। कई लोग अपनी गाड़ियां रोककर छात्रों के प्रयास की सराहना करते नजर आए।
लकपा ने कहा,
“भले ही वे हमारे साथ सफाई में शामिल नहीं हो पाए, लेकिन कई लोगों ने रुककर हमें प्रोत्साहित किया। उनका समर्थन हमारे लिए बहुत मायने रखता है।”
आगे की राह
सकारात्मक प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर छात्र भविष्य में और बड़े स्तर पर सफाई अभियान आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।
लकपा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा,
“बस शुरुआत करें। भले ही संसाधन कम हों, लेकिन अकेले शुरुआत करें। जब लोग आपकी सच्ची नीयत देखेंगे, तो वे आपका साथ जरूर देंगे।”
उन्होंने आगे कहा,
“युवा भारत का भविष्य हैं और सकारात्मक बदलाव लाना हमारी जिम्मेदारी है।”
इन छात्रों की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि छोटे-छोटे कदम भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं और एक साधारण सफाई अभियान भी लोगों को प्रेरित करने वाला आंदोलन बन सकता है।



