‘दो कौड़ी के’ बयान से मचा बवाल, यूट्यूब शिक्षकों और छात्रों ने किया पलटवार
अंजना ओम कश्यप ने यूट्यूब शिक्षकों को बताया ‘बड़ा फ्रॉड’, ऑनलाइन शिक्षा जगत में मचा विवाद
नई दिल्ली।
पिछले कुछ दिनों से भारतीय सोशल मीडिया पर एक बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। यह बयान किसी छात्र, नेता या उद्योगपति का नहीं, बल्कि देश के प्रमुख हिंदी समाचार चैनलों में से एक की वरिष्ठ पत्रकार और मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप का है। उन्होंने एक लाइव टीवी डिबेट के दौरान कई लोकप्रिय यूट्यूब शिक्षकों को “दो कौड़ी के” और “बड़े फ्रॉड” बताते हुए उनकी योग्यता पर सवाल उठाए।

जब स्टूडियो से शिक्षकों पर हुआ हमला
29-30 मई 2026 को प्रसारित एक टीवी बहस में अंजना ओम कश्यप ने यूट्यूब शिक्षकों को निशाने पर लेते हुए कहा कि ऐसे शिक्षक “कुछ नहीं जानते”, वे ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाने के नाम पर सिर्फ व्यूज बटोरते हैं, नाटक करते हैं और छात्रों से पैसा कमाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों के पास ज्ञान नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे वे खुद को बहुत बड़ा व्यक्ति समझने लगे हैं और हर विषय पर बोलने लगे हैं।
यह वीडियो क्लिप देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर लाखों लोगों ने इसे साझा किया और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
शिक्षकों ने दिया जवाब
लोकप्रिय गणित शिक्षक और यूट्यूब चैनल ‘अभिनय मैथ्स’ के संस्थापक अभिनय शर्मा ने सबसे पहले सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यूट्यूब शिक्षक कुछ नहीं जानते, तो फिर पिछले कई वर्षों से लाखों छात्रों को जेईई, नीट, एसएससी और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कौन करा रहा है?
उन्होंने कहा कि देश के छोटे शहरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यूट्यूब शिक्षा एक महत्वपूर्ण विकल्प बन चुकी है, जहां महंगे कोचिंग संस्थानों तक पहुंच संभव नहीं है।
वहीं ओशन गुरुकुल्स की शिक्षिका सुमन मैम ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए यूट्यूब पर मुफ्त मैराथन कक्षाएं चलाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि एक एयर-कंडीशंड स्टूडियो में बैठकर कोई पत्रकार उन्हें और उनके जैसे शिक्षकों को फ्रॉड कैसे कह सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीवी चैनल टीआरपी के लिए बहसें चलाते हैं, जबकि पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते।
छात्रों की प्रतिक्रिया ने बढ़ाया विवाद
इस विवाद का सबसे बड़ा पहलू छात्रों की प्रतिक्रिया रही। हजारों नहीं, बल्कि लाखों छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और अन्य राज्यों के छात्रों ने बताया कि कैसे यूट्यूब शिक्षकों ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद की और कठिन समय में मार्गदर्शन दिया।
कई छात्रों ने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्कूल और कोचिंग संस्थान बंद थे, तब यूट्यूब शिक्षकों ने ही पढ़ाई को जारी रखा और लाखों विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाई।
इसी कारण “दो कौड़ी के” जैसी टिप्पणी छात्रों को बेहद आपत्तिजनक लगी। उनका कहना था कि जिन शिक्षकों ने उन्हें सरकारी नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना पूरा करने में मदद की, उन्हें इस तरह अपमानित करना गलत है।
बड़ा सवाल: टीवी बनाम डिजिटल शिक्षा
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान का मामला नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक टीवी मीडिया और तेजी से बढ़ते डिजिटल शिक्षा तंत्र के बीच बढ़ते अविश्वास को भी दर्शाता है।
पिछले कुछ वर्षों में टीवी समाचार चैनलों पर सनसनीखेज बहसों और टीआरपी आधारित पत्रकारिता के आरोप लगते रहे हैं। दूसरी ओर, यूट्यूब शिक्षकों ने करोड़ों छात्रों का भरोसा अर्जित किया है।
हालांकि यह भी सच है कि ऑनलाइन शिक्षा की दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो भ्रामक दावे करते हैं और छात्रों को गुमराह करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन किसी पूरे समुदाय को एक साथ “फ्रॉड” कहना उचित नहीं माना जा सकता।
अभी तक नहीं आया कोई स्पष्टीकरण
31 मई 2026 तक अंजना ओम कश्यप या संबंधित समाचार चैनल की ओर से इस मामले में कोई सार्वजनिक माफी या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
इस बीच सोशल मीडिया पर विवाद लगातार जारी है। शिक्षक अपने जवाबी वीडियो पोस्ट कर रहे हैं और छात्र अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
अब यह विवाद केवल एक टीवी क्लिप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े सवाल का रूप ले चुका है—भारतीय छात्रों की वास्तविक मदद कौन कर रहा है और यह तय करने का अधिकार किसके पास है?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि देश के लाखों छात्रों ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ मजबूती से दर्ज करा दी है।

