उत्तराखंड का बहुचर्चित रणबीर एनकाउंटर मामला
फर्जी एनकाउंटर प्रकरण में 17 पुलिसकर्मी हुए थे दोषी करार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 पुलिसकर्मियों को किया था बरी

इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट दिल्ली का दरवाजा खटखटाया, जहां चार साल सुनवाई चली। हाईकोर्ट ने 2018 में अपने फैसले में सात पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए निचली अदालत की सुनाई सजा को बरकरार रखा था जबकि 11 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया था।
इस फैसले को लेकर सात पुलिसकर्मियों (एसके जायसवाल, नितिन चौहान, राजेश, चंद्रमोहन रावत, जीडी भट्ट, नीरज यादव व अजीत सिंह) ने देश की सर्वोच्च अदालत में अपील की, जिसे बुधवार को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका स्वीकार होने को इन पुलिसकर्मियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
मुठभेड़ को लेकर भारतीय किसान यूनियन समेत कई संगठनों ने दून में हंगामा किया था। दो दिन बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस कटघरे में आ गई थी। रणबीर के शरीर पर गोलियों के 22 निशान पाए गए थे।
यही नहीं रिपोर्ट में ब्लैकनिंग यानी सटाकर गोलियां मारना और 28 चोटों के निशान भी पाए गए। इस मामले में पहले सीबीसीआईडी ने विवेचना की और फिर सीबीआई ने इसकी सारी परतें उधेड़ दी थी।

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