पटना। बिहार में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व डीजीपी Gupteshwar Pandey ने वीडियो जारी कर पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है। उन्होंने कहा कि यदि भरत भूषण तिवारी ने हथियार डालकर सरेंडर कर दिया था, तो उसके बाद गोली चलाना हत्या की श्रेणी में आता है। पांडे ने दावा किया कि मृतक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और वह स्थानीय लोगों की समस्याओं को उठाने का काम करता था। उन्होंने मामले की हाईकोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच कराने तथा घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की
बिहार के भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले पर पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे ने वीडियो जारी कर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे एक ‘फर्जी एनकाउंटर’ का रूप दिया है।
वह अपराधी नहीं, जनता की आवाज था
पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि भरत भूषण तिवारी कोई कोई चोर, डाकू, लुटेरा, हत्यारा, रंगबाज या आतंकवादी नहीं था। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था।
वह केवल जवनिया गांव के विस्थापितों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने वाला एक आम नागरिक था। हालांकि, उन्होंने माना कि मृतक के विरोध करने का तरीका गलत हो सकता था, लेकिन उसका उद्देश्य पवित्र था।
मानसिक रूप से विक्षिप्त होने का दावा
उन्होंने कहा कि जिला पुलिस प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में खुद इस बात का उल्लेख है कि मृतक मानसिक रूप से विक्षिप्त था।
गुप्तेश्वर पांडे ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को उसके मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की जानकारी थी, तो उसे संभालने के लिए अन्य उपाय क्यों नहीं किए गए?
हथियार फेंकने के बाद मारी गई गोली
पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि जब उस व्यक्ति ने अपना हथियार फेंक दिया, सरेंडर कर दिया और वह पूरी तरह निहत्था हो गया, तब पुलिस ने उस पर गोलियों की बौछार क्यों की? हथियार डालने के बाद गोली चलाना सीधे तौर पर हत्या का मामला बनता है, यह कोई ‘जेन्युइन एनकाउंटर’ नहीं है।
न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग
उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल पुलिसकर्मियों और टीम का नेतृत्व करने वाले अधिकारियों पर तुरंत हत्या का केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के किसी माननीय न्यायाधीश की देखरेख में एसआईटी (SIT) गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच हो।



