देहरादून।
डाकरा से हाथीपांव तक प्रस्तावित फोर-लेन सड़क परियोजना के लिए लगभग 700 पेड़ों की कटाई की योजना को लेकर पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की इस परियोजना के तहत करीब 32 से 40 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना है।
पर्यावरण बचाओ आंदोलन 3.0 से जुड़े कार्यकर्ताओं के अनुसार, परियोजना के लिए चिह्नित लगभग 700 पेड़ों में से 110 पेड़ केवल डाकरा क्षेत्र में हैं। इनमें पीपल और बरगद जैसे कई ऐसे वृक्ष शामिल हैं जिनकी आयु लगभग 150 वर्ष या उससे अधिक बताई जा रही है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि विकास के नाम पर इन पुराने और महत्वपूर्ण वृक्षों की बलि दी जा रही है, जबकि यह परियोजना मुख्य रूप से मसूरी आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाई जा रही है। उनका तर्क है कि मसूरी की वहन क्षमता (Carrying Capacity) पहले ही अपनी सीमा तक पहुंच चुकी है और इस तरह की परियोजनाएं उस पर अतिरिक्त दबाव डालेंगी।
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पर्यावरण प्रेमियों ने यह भी सवाल उठाया है कि एक ओर 5 जून को वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों पुराने पेड़ों की कटाई की जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर देहरादून के जागरूक नागरिकों द्वारा “पर्यावरण बचाओ आंदोलन 3.0 – किमाड़ी-डाकरा इन डेंजर” के तहत 4 जून को शाम 5 बजे वैदिक घराट, डाकरा बाजार में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि फोर-लेन सड़क परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।

