ई बिहार है बाबू! न लाठी का डर, न धुएं का असर… बिहारी लइकों का भौकाल हमेशा अमर!
कहावत है, ‘हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फारसी क्या!’ लेकिन आज के इस डिजिटल और Gen Z वाले युग में इस कहावत को थोड़ा अपडेट करने की जरूरत है. और इसमें बिहारी तड़का लगा हो तो नया मुहावरा होना चाहिए- ‘हाथ में मोबाइल हो तो डर क्या और बिहारी जब फॉर्म में हो तो टियर गैस का असर क्या!’



