UTTARAKHAND

पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश की सभी नदियों में होगी एंग्लिंग

  • वॉलेंटरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के गठन का निर्णय

  •  इको विकास समितियों का होगा गठन

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

वन्य जीव बोर्ड बैठक के निर्णय

’राज्य में कस्तूरी मृग और राज्य पक्षी मोनाल के संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

’नंधौर और सुरई में नहीं बनेगा टाईगर रिजर्व व बफर जोन, प्रस्ताव खारिज

’बाघ, गुलदार व जंगली हाथियों की धारण क्षमता पर होगा अध्ययन, केंद्र से ली जाएगी आर्थिक मदद

’लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग को उच्चीकृत करने का प्रस्ताव पारित

’अब हर तीन से चार माह के बीच होगी बोर्ड बैठक

’आरक्षित क्षेत्र में विकास कार्यो के लिए इको समितियों का होगा गठन

’बफर जोन व सेंचुरी क्षेत्र में आने वाले गांवों में बनेंगे शौचालय, लगेंगी सोलर लाइट्स

’कंडी मार्ग पर चार अलग-अलग प्रस्तावों पर किया गया विचार

’सीमांत सड़कों पर सड़क व बंकर बनाने के सेना के प्रस्तावों को भी मंजूरी

देहरादून: प्रदेश में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए राज्य वन्यजीव बोर्ड ने एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत अब प्रदेश की सभी नदियों में मत्स्य आखेट (एंग्लिंग) को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए ग्रामीणों की सहायता से ही वॉलेंटरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के गठन का निर्णय लिया गया है। फोर्स किसी भी वन्यजीव-मानव संघर्ष वाले क्षेत्र में फस्ट रिस्पांडर के रूप में कार्य करेगी। इसके साथ ही प्रदेश में संरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्यो को गति देने के लिए इको विकास समितियों का भी गठन किया जाएगा।

शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव बोर्ड बैठक हुई, जिसमें कई अहम निर्णय लिए गए। इसकी जानकारी देते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने बताया कि बैठक में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एंग्लिंग को मंजूरी प्रदान की है। गत वर्ष इसे प्रतिबंधित कर दिया था। बोर्ड ने माना है कि एंग्लिंग शुरू करने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से त्रस्त गांवों में स्थानीय निवासियों को स्वेच्छा के आधार पर लेकर एक प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया जाएगा। इन्हें वर्दी व उपकरण उपलब्ध कराने के साथ ही प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

संरक्षित क्षेत्रों के भीतर व निकटवर्ती गांवों में इको विकास कार्यक्रम को पुनर्जीवित किया जाएगा। दरअसल, राज्य में नए संरक्षित क्षेत्र घोषित किए गए हैं। यहां अब विकास कार्यो को गति देने के लिए इको समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों के पास संरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्य करने के अधिकार होते हैं, जो राज्य के विभागों के पास नहीं होते।

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