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बंग बंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या में शामिल बांग्लादेश सेना के एक पूर्व अधिकारी को दी गयी फांसी

आधी रात को बंग बंधु की हत्या में शामिल पूर्व सैन्य अधिकारी अब्दुल मजीद को मिली फांसी

हत्या के दोषी अब्दुल मजीद को लगभग 45 साल फरार रहने के बाद इसी मंगलवार को ढाका से किया गया था गिरफ्तार 

ढाका, प्रेट्र : बंग बंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या में शामिल बांग्लादेश सेना के एक पूर्व अधिकारी को शनिवार-रविवार की रात फांसी दे दी गई। इस हत्या के दोषी को लगभग 45 साल फरार रहने के बाद इसी मंगलवार को ढाका गिरफ्तार किया गया था।

ढाका सेंट्रल जेल के जेलर महबूबुल इस्लाम ने बताया कि सेना के पूर्व कैप्टन अब्दुल माजिद को रविवार लगते ही रात 12.01 (स्थानीय समय) पर फांसी दे दी गई।

उल्लेखनीय है बांग्लादेश के संस्थापक बंग बंधु की हत्या 1975 में एक तख्ता पलट अभियान में हुई थी। सेना के कई अधिकारी इसमें शामिल था। हत्या के बाद अब्दुल माजिद फरार हो गया था। बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने बताया कि माजिद ने खुद हत्या की बात स्वीकार की था। वह नवंबर 1975 में ढाका जेल में चार लोगों की हत्या में शामिल था।

अभियोजन पक्ष के वकील के अनुसार माजिद फरारी के दौरान करीब 23 साल कोलकाता में छिपकर रहा था। वह पिछले महीने की 15 या 16 तारीख को ढाका पहुंचा जहां उसे सेना की पुलिस ने पिछले मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को उसकी पत्नी और चार रिश्तेदारों ने जेल में उसके साथ करीब ढाई घंटे मुलाकात की। इससे एक दिन पूर्व बांग्लादेश के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्दुल हामिद ने माजिद की दया याचिका ठुकरा दी थी। ढाका के जिला और सत्र न्यायाधीश हेलालुद्दीन चौधरी ने कोरोना वायरस फैलने के कारण चल रही छुट्टी के दौरान उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत के बाद डेथ वारंट जारी किया था।

माजिद ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उसने बंगबंधु रहमान की हत्या की है। माजिद, रहमान की हत्या में शामिल रहे उन दर्जनों लोगों में से एक है जिनकी फांसी की सजा को 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। 1998 में निचली अदालत ने कुछ सैन्य अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई थी जो कि रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या में शामिल रहे थे।

पीएम शेख हसीना, रहमान की बेटी हैं। हसीना इस घटना में बच गई थीं क्योंकि उस वक्त वह अपनी बहन के साथ जर्मनी के दौरे पर थीं। उस घटना में रहमान के परिवार में सिर्फ यही दो बहनें जिंदा बच पाई थीं। बताया जाता है कि उनकी बाद की सरकारों ने रहमान के हत्यारों को कूटनीतिक मिशन पर विदेश भेज दिया था।

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