(डॉ.कमल किशोर डुकलान ‘सरल’)
हरिद्वार की ज्ञान-परम्परा में कुछ ऐसे नाम हैं,जिसका व्यक्तित्व ही एक संस्था बन जाते हैं। डॉ. शिवशंकर जायसवाल जी व्यक्तित्व एक ऐसा ही एक नाम हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक, उत्कृष्ट लेखक, संवेदनशील कवि, निर्भीक पत्रकार और वरिष्ठ साहित्यकार के रूप में आपका व्यक्तित्व बहुआयामी है। आपके स्वभाव में विनम्रता की शीतलता, विचारों में सुलझापन और आचरण में विद्वता का तेज एक साथ दिखाई देता है, फिर भी आप अत्यंत सरल, सहज और आत्मीय हैं। यही सरलता आपको श्रेष्ठ बनाती है।
शिवशंकर जायसवाल वैचारिक यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन विद्यार्थी परिषद के एक कार्यकर्ता के रूप में प्रारम्भ हुई थी। छात्र जीवन की वह निष्ठा और राष्ट्र-भाव आज भी उसी ऊर्जा से अनवरत प्रवाहित है।
डॉ.शिवशंकर जायसवाल दशक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हरिद्वार नगर के नगर कार्यवाह के दायित्व का वर्षों तक अत्यंत कुशलता और समर्पण के साथ निर्वहन किया। संगठन के लिए आपका जीवन तपस्या की तरह रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में आप एक युग-पुरुष की तरह स्मरण किये जाते हैं। हरिद्वार के प्रतिष्ठित एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज में आप वर्षों तक प्राचार्य रहे। मूलतः अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर होते हुए भी शिक्षा, संस्कृति, इतिहास और समाज के विविध विषयों पर आपकी असाधारण पकड़ रही है। इसीलिए विद्यार्थी आपको केवल एक विषय का नहीं, अपितु अनेक विषयों का आचार्य मानते थे। आपकी कक्षा केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन पढ़ाती थी।
लेखनी आपके व्यक्तित्व का दूसरा सशक्त आयाम है। आप एक सिद्धहस्त कवि होने के साथ-साथ एक लेखक और एक चर्चित पत्रकार भी। आपके चिंतनपरक आलेख ‘पाञ्चजन्य’, ‘यथावत’, ‘ऑर्गनाइज़र’ और ‘Times of India’ जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं,जो आपकी वैचारिक स्पष्टता और अध्ययन की गहराई के साक्षी हैं।
हरिद्वार नगर के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नगर की अनेक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता है। वर्तमान में आप सरस्वती विद्या मंदिर, सेक्टर-2, भेल हरिद्वार की स्थानीय प्रबंध समिति में सम्मानित अध्यक्ष के रूप में विद्यालय को दिशा प्रदान कर रहे हैं। आपके नेतृत्व में विद्यालय को सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए अनेक उल्लेखनीय और दूरदर्शी कार्य हुए हैं। आश्चर्य और प्रेरणा का विषय यह है कि उम्र के अस्सी प्लस के इस वरिष्ठ पड़ाव पर भी आप अत्यंत स्वस्थ, सक्रिय और कर्मयोगी बने हुए हैं। आप विद्यालय के प्रबंधन और उसकी व्यवस्थाओं की चिंता ठीक वैसे ही करते हैं, जैसे एक माँ अपने गर्भस्थ शिशु की चिंता करती है।
आत्मीयता और वात्सल्य से भरा आपका यही भाव है जो विद्यालय के प्रत्येक शिक्षक को आपमें एक अभिभावक का दर्शन कराता है। शिक्षकों की छोटी से छोटी समस्या को अपनी समस्या समझकर उसका समाधान करना आपकी संवेदनशीलता मेरे जैसे अनेक स्वयंसेवकों के लिए सदा प्रेरणा का स्रोत है।
सम्पर्क की श्रृंखला में आज हरिद्वार संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय के निजि सचिव एवं संघ विचार पत्र पांचजन्य पूर्व सह सम्पादक,मेरे मित्र एवं विभिन्न पुस्तकों के लेखक मनोज गहतोड़ी के साथ डॉ.शिव शंकर जायसवाल से उनसे आवास पर आत्मीय भेंट हुई भेंट हुई ।
भेंट के सुअवसर पर उत्तराखंड भाषा संस्थान देहरादून के सहयोग से मेरे द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय पर्व एवं उत्सव’ आपको भेंट करते हुए यह क्षण मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य का क्षण था, जिसे लेखक मनोज गहतोड़ी ने अपने कैमरे में सहेज लिया। यह छायाचित्र केवल एक भेंट का नहीं, बल्कि एक शिष्य द्वारा अपने गुरु-तुल्य अभिभावक से आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक है।



